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Class X – Hindi B – Paper – 1

Hindi B (085)

Class X (2024-25)

निर्धारित समय: 3 hours                                                                                      अधिकतम अंक: 80

सामान्य निर्देश:

• इस प्रश्नपत्र में चार खंड हैं- क, ख, ग और घ

• खंड क में अपठित गदयांश से प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए दीजिए।

• खंड ख में व्यावहारिक व्याकरण से प्रश्न पूछे गए हैं, आंतरिक विकल्प भी दिए गए हैं।

• खंड ग पाठ्यपुस्तक पर आधारित है, निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।

• खंड घ रचनात्मक लेखन पर आधारित है आंतरिक विकल्प भी दिए गए हैं।

• प्रश्न पत्र में कुल 16 प्रश्न हैं, सभी प्रश्न अनिवार्य है।

• यथासंभव सभी खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।

खंड क अपठित बोध

1. निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

मैं यह नहीं मानता कि समृद्धि और आध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर, मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए जीवन बिता रहा हूँ, लेकिन मैं सर्वत्र समृद्धि की कद्र करता हूँ, क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अंततः हमारी आज़ादी को बनाए रखने में सहायक है। आप अपने आस-पास देखेंगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी। अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रह्माण्ड आपको अनंत तक फैला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे । जो कुछ भी हम इस संसार में देखते हैं वह ऊर्जा का ही स्वरूप है। जैसा कि महर्षि अरविंद ने कहा है कि हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं। इसलिए जब हमने यह जान लिया है कि आत्मा और पदार्थ दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, वे एक-दूसरे से पूरा तादात्म्य रखे हुए हैं तो हमें यह एहसास भी होगा कि भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है।

1. लेखक के अनुसार समृद्धि और आध्यात्म में क्या सम्बन्ध है?

(क) एक-दूसरे के विरोधी हैं।

(ख) एक-दूसरे के पूरक हैं

(ग) एक-दूसरे से संबंधित नहीं हैं

(घ) समृद्धि, आध्यात्म से बेहतर है

Ans. (ख) एक-दूसरे के पूरक हैं

2. भौतिक शब्द का विलोम शब्द क्या है?

(क) अभौतिक

(ख) सांसारिक

(ग) ईश्वरीय

(घ) स्थूल

Ans. (क) अभौतिक

3. समृद्धि को आवश्यक क्यों बताया गया है?

(क) समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है

(ख) समृद्धि हमारी आज़ादी को बनाए रखने में सहायक है

(ग) समृद्धि और आध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं।

(घ) उपरोक्त सभी

Ans. (घ) उपरोक्त सभी

4. भौतिक वस्तुओं की इच्छा के बारे में लेखक का क्या मत है? ।

Ans. लेखक भौतिक वस्तुओं की इच्छा को गलत नहीं मानता। आत्मा और पदार्थ दोनो ही अस्तित्व का हिस्सा हैं व एक दूसरे से तालमेल रखते हैं और अध्यात्म के पूरक हैं अतः भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर- आध्यात्मिक बात लेखक को नहीं लगती।

5. लेखक ने प्रकृति का क्या स्वभाव बताया है?

Ans. लेखक ने प्रकृति के स्वभाव के बारे में बताया है कि उसके द्वारा कोई भी काम आधे-अधूरे मन से नहीं किया जाता। उपयुक्त मौसम में बगीचे में फूलों की बहार दिखती है तो ऊपर देखने पर हमें ब्रह्माण्ड अनंत तक विस्तृत दिखाई देता है। प्रकृति उद्दाम और खुलकर कार्य करती है उसमें कहीं कहीं कोई कमी दिखाई नहीं देती।

2. निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

समय परिवर्तनशील है। जो आज हमारे साथ नहीं है कल हमारे साथ होगा और हम अपने दुःख और असफलता से मुक्ति पा लेंगे यह विचार ही हमें सहजता प्रदान कर सकता है। हम दूसरे की सम्पन्नता, ऊँचा पद और भौतिक साधनों की उपलब्धता देखकर विचलित हो जाते हैं कि यह उसके पास तो है किन्तु हमारे पास नहीं है। यह हमारे विचारों की गरीबी का प्रमाण है और यही बात अन्दर विकट असहज भाव का संचालन करती है।

जीवन में सहजता का भाव न होने के वजह से अधिकतर लोग हमेशा ही असफल होते हैं। सहज भाव लाने के लिए हमें एक तो नियमित रूप से योगासन-प्राणायाम और ध्यान करने के साथ ईश्वर का स्मरण अवश्य करना चाहिए। इसमें हमारे तन मन और विचारों के विकार बाहर निकलते हैं और तभी हम सहजता के भाव का अनुभव कर सकते हैं। याद रखने की बात है कि हमारे विकार ही अन्दर हैं। ईर्ष्या द्वेष और परनिंदा जैसे दुर्गुण हम अनजाने में ही अपना लेते हैं और अंततः जीवन में हर पल असहज होते हैं और उससे बचने के लिए आवश्यक है कि हम आध्यात्म के प्रति अपने मन और विचारों का रुझान रखें।

1. अधिकतर लोग हमेशा ही असफल क्यों होते हैं?

(क) जीवन में सहजता का भाव न होने के कारण

(ख) आध्यात्म के प्रति रुझान न होने के कारण

(ग) गरीबी के कारण

(घ) सम्पन्नता, ऊँचा पद और भौतिक साधनों की उपलब्धता के कारण

Ans. (क) जीवन में सहजता का भाव न होने के कारण

2. असहजता से बचने का क्या उपाय है?

(क) ईर्ष्या – द्वेष और परनिंदा को छोड़कर

(ख) योगासन-प्राणायाम और ध्यान करके

(ग) अधिक धन कमाकर

(घ) आध्यात्म के प्रति रुझान रखकर

Ans. (घ) आध्यात्म के प्रति रुझान रखकर

3. कौन से विचार हमें सहजता प्रदान कर सकते हैं?

(क) आध्यात्मिक विचार

(ख) परनिंदा के विचार

(ग) धन अर्जन के विचार

(घ) स्वस्थ शरीर के विचार

Ans. (क) आध्यात्मिक विचार

4. विचारों की गरीबी से लेखक का क्या अभिप्राय है?

Ans. दूसरे की सम्पन्नता, ऊँचा पद और भौतिक साधनों की उपलब्धि अर्थात सम्पन्नता को देखकर अपना आत्मसंयम खो देना, उनसे ईर्ष्या रखना तथा यह सोचना कि यह उसके पास तो है लेकिन हमारे पास नहीं हैं, ऐसे तुच्छ विचारों को मन में लाना ही विचारों की गरीबी है।

5. हम सहजता का विकास कैसे कर सकते हैं?

Ans. सहजता के विकास के लिए हमें नियमित रुप से योगासन, प्राणायाम और ध्यान करना चाहिए साथ ही ईश्वर का स्मरण भी अवश्य करना चाहिए। इससे हमारे तन-मन और विचारों में संयम आएगा और विकार बाहर निकलेंगे जिससे हम सहजता का अनुभव कर सकते हैं।

खंड ख – व्यावहारिक व्याकरण

3. निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

i. मुझे ऋतु घर से दिखाई दे रही है। वाक्य में क्रिया पदबंध ढूँढ कर लिखिए।

Ans. दिखाई दे रही है

ii. शेर की तरह दहाड़ने वाले तुम काँप क्यों रहे हो । रेखांकित पदबंध का नाम लिखिए।

Ans. सर्वनाम पदबंध

iii. विरोध करने वाले व्यक्तियों में से कोई नहीं आया। इस वाक्य में प्रयुक्त सर्वनाम पदबंध लिखिए।

Ans. विरोध करने वाले व्यक्तियों में से कोई

iv. दिन-रात एक करने वाला छात्र कक्षा में प्रथम आएगा। इस वाक्य में संज्ञा पदबंध क्या है?

Ans. दिन रात एक करने वाला छात्र

v. वह बाजार की ओर आया होगा। रेखांकित पदबंध का नाम लिखिए।

Ans. क्रिया पदबंध

4. नीचे लिखें वाक्यों में से किन्हीं चार वाक्यों का निर्देशानुसार रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण कीजिए-

i. जब वह गया, उसकी बड़ी आवभगत की गई। (सरल वाक्य में)

Ans. वहाँ जाने पर उसकी बड़ी आवभगत हुई।

ii. मैं स्टेशन गया पर गाड़ी छूट चुकी थी। (सरल वाक्य में)

Ans. मेरे स्टेशन जाते ही गाड़ी छूट गई।

iii. अभी-अभी आने वाले लड़के को पानी पिलाओ। (संयुक्त वाक्य में)

Ans. वह लड़का अभी- अभी आया है इसीलिए उसे पानी पिलाओ।

iv. वह रोज व्यायाम करता है, इसलिए स्वस्थ रहता है। (सरल वाक्य में)

Ans. रोज व्यायाम करने से वह स्वस्थ रहता है।

v. हरिहर काका ने ठाकुरबारी के महंत, पुजारी और साधुओं की जो काली करतूतें थीं उनका पर्दाफाश करना शुरू किया। (सरल वाक्य में)

Ans. हरिहर काका ने ठाकुरबारी के महंत, पुजारी और साधुओं की काली करतूतों का पर्दाफ़ाश करना शुरु किया।

5. निर्देशानुसार किन्हीं चार प्रश्नों का उत्तर दीजिए और उपयुक्त समास का नाम भी लिखिए।

i. प्रत्येक घर (विग्रह कीजिए)

Ans. प्रत्येक घर घर-घर (अव्ययीभाव समास)

ii. माखनचोर (विग्रह कीजिए)

Ans. माखनचोर -माखन को चुराने वाला (तत्पुरुष समास)

iii. शूल है पाणी में जिसके (समस्त पद लिखिए)

Ans. शूल है पाणी में जिसके शूलपाणी (बहुब्रीहि समास)

iv. ऋषि और मुनि (समस्त पद लिखिए)

Ans. ऋषि और मुनि ऋषि-मुनि (द्वंद्व समास)

v. तीन वेणियों का समूह (समस्त पद लिखिए)

Ans. तीन वेणियों का समूह त्रिवेणी (द्विगु समास)

6. निम्नलिखित में से किन्हीं चार मुहावरों का वाक्य में प्रयोग इस प्रकार कीजिए कि उनका आशय स्पष्ट हो जाए

i. नमक मिर्च लगाना

Ans. नमक मिर्च लगाना उसने नमक मिर्च लगाकर कहानी को रोचक बना दिया।

ii. दौड़-धूप करना

Ans. दौड़-धूप करना – उसे अपनी नौकरी बचाने के लिए बहुत दौड़-धूप करनी पड़ी।

iii. बाल-बाल बचना

Ans. बाल-बाल बचना – वह दुर्घटना में बाल-बाल बच गया।

iv. कमर कसना

Ans. कमर कसना अब हमें चुनाव लड़ने के लिए कमर कसनी होगी।

v. आसमान के तारे तोड़ना

Ans. आसमान के तारे तोड़ना – हर माँ-बाप अपने बच्चों के लिए आसमान के तारे तोड़ लाते हैं।

खंड ग गद्य खंड (पाठ्यपुस्तक)

7. अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:

एक दिन संध्या समय, होस्टल से दूर मैं एक कनकौआ लूटने बेतहाशा दौड़ा जा रहा था। आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो । बालकों की पूरी सेना लग्गे और झाड़दार बाँस लिए इनका स्वागत करने को दौड़ी आ रही थी। किसी को अपने आगे-पीछे की खबर न थी। सभी मानो उस पतंग के साथ ही आकाश में उड़ रहे थे, जहाँ सब कुछ समतल है, न मोटरकारें हैं, न ट्राम, न गाड़ियाँ ।

सहसा भाई साहब से मेरी मुठभेड़ हो गई, जो शायद बाजार से लौट रहे थे। उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया और उग्र भाव से बोले इन बाजारी लौंडों के साथ धेले के कनकौए के लिए दौड़ते तुम्हें शर्म नहीं आती? तुम्हें इसका भी कुछ लिहाज नहीं कि अब नीची जमात में नहीं हो, बल्कि आठवीं जमात में आ गए हो और मुझसे केवल एक दरजा नीचे हो । आखिर आदमी को कुछ तो अपनी पोजीशन का खयाल रखना चाहिए ।

(i) संध्या समय होस्टल से दूर लेखक बेतहाशा क्यों दौड़ा जा रहा था?

क) कनकौआ लूटने के लिए

ख) बड़े भाई साहब की मार से बचने के लिए

ग) भाई साहब रास्ते में न मिल जाएँ

घ) अध्यापक से डरकर

Ans. क) कनकौआ लूटने के लिए

(ii) आकाशगामी पथिक से लेखक किसकी ओर इंगित कर रहा है?

क) पक्षी की ओर

ख) पतंग की ओर

ग) बड़े भाई साहब की ओर

घ) सूर्य की ओर

Ans. ख) पतंग की ओर

(iii) बाजार में लेखक की किससे मुठभेड़ हो गई?

क) अध्यापक से

ख) पिताजी से

ग) बड़े भाई साहब से

घ) एक मित्र से

Ans. ग) बड़े भाई साहब से

(iv) अब नीची जमात में नहीं हो, बल्कि आठवीं जमात में आ गए हो यह कथन किसके लिए

कहा गया है?

क) लेखक के लिए

ख) लेखक के मित्र के लिए

ग) बड़े भाई साहब के लिए

घ) इनमें से कोई नहीं

Ans. क) लेखक के लिए

(v) मुझसे केवल एक दरजा नीचे हो कथनानुसार लेखक के बड़े भाई साहब किस कक्षा में थे?

क) आठवीं कक्षा में

ख) सातवीं कक्षा में

ग) दसवीं कक्षा में

घ) नौवीं कक्षा में

Ans. घ) नौवीं कक्षा में

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए:

(i) 26 जनवरी, 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या- क्या तैयारियाँ की गईं? डायरी का एक पन्ना पाठ के आधार पर लिखिए।

Ans. 26 जनवरी, 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए कलकत्ता के लोगों को अपने मकानों तथा सार्वजनिक स्थानों पर झंडा फहरान का निश्चय किया था। केवल प्रचार में 2000 रू खर्च किए गए थे। घरों को ऐसे सजाया गया था मानो आजादी मिल गई हो। सायं चार बजे एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया जिसमें लोगों को हर दिशा से जुलूस में शामिल होकर धर्म को लेकर मोड़ पर पहुँचना था।

(ii) टी-सेरेमनी किस प्रकार से लाभदायक होती है?

Ans. यह झेन संस्कृति की देन है। इससे मानसिक रोग का उपचार होता है, मानसिक सन्तुलन कायम होता है तथा भूत-भविष्य की चिंता नहीं रहती। टी-सेरेमनी का शांतिपूर्ण वातावरण सभी प्रकार के तनावों से मुक्ति प्रदान कर वर्तमान में जीना सिखाता है।

(iii) लेफ्टिनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है ? कारतूस पाठ के आधार पर बताइए ।

Ans. लेफ्टिनेंट को टीपू सुल्तान और वजीर अली के किस्से सुनने के बाद ऐसा लगा कि कंपनी के खिलाफ पूरे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ रही है क्योंकि कंपनी की फौज भी इन विद्रोहियों से निपटना में कामयाब नहीं हो पा रही थी।

(iv) तीसरी कसम फ़िल्म में दुख के भाव को किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है? दुख के वीभत्स रूप से यह दुख किस प्रकार भिन्न है? लिखिए ।

Ans. तीसरी कसम फ़िल्म में दुख के भाव को सहज स्थिति में प्रकट किया गया है। इस फ़िल्म में दुखों को जीवन के सापेक्ष रूप में प्रस्तुत किया है। दुख के वीभत्स रूप से यह सर्वथा भिन्न है क्योंकि यहाँ दुखों से घबराकर लोग पीठ नहीं दिखाते। दुखों से हमें घबराना नहीं चाहिए। दुखों का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए। दुख के इस रूप को देखकर मनुष्य व्यथाकरुणाको सकारात्मक ढंग से स्वीकार करता है। वह दुखों से परास्त नहीं होता, निराश नहीं होता। इस फ़िल्म में दुख की सहज स्थिति लोगों को आशावादी बनाती है।

खंड ग काव्य खंड (पाठ्यपुस्तक)

9. अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:

क्षुधार्त रंतिदेव ने दिया करस्थ थाल भी,

तथा दधीचि ने दिया परार्थ अस्थिजाल भी ।

उशीनर क्षितीश ने स्वमांस दान भी किया,

सहर्ष वीर कर्ण ने शरीर चर्म भी दिया।

अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे ?

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।

(i) रंतिदेव कौन थे?

क) एक दानी राजा

ख) महाराजा

(ग) ऋषि

(घ) सेनापति

Ans. क) एक दानी राजा

(ii) कबूतर को बचाने के लिए राजा शिवि ने क्या किया?

क) इनमें से कोई नहीं

ख) अपना राज्य दान किया

ग) अपना भोजन दान दिया

घ) अपने मांस का दान दिया

Ans. घ) अपने मांस का दान दिया

(iii) किसने अपने कवच-कुंडल दान में दिए?

(क) दधीचि ने

(ख) रंतिदेव ने

ग) कुंती पुत्र कर्ण ने

घ) राजा शिवि ने

Ans. ग) कुंती पुत्र कर्ण ने

(iv) वास्तव में असली मनुष्य किसको माना है?

क) जो दूसरों की चिंता करता है।

ख) जो संसार को त्यागकर तपस्वी बन जाता है।

ग) जो अपने लिए जीता है।

घ) जो परोपकारी भाव रखता है।

Ans. घ) जो परोपकारी भाव रखता है।

(v) दधीचि ने समाज के लिए क्या त्याग किया ?

क) अपना ऐश्वर्य

ख) अपने शरीर की हड्डियाँ

ग) अपनी धन संपत्ति

घ) अपना राजपाट

Ans. ख) अपने शरीर की हड्डियाँ

10. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए:

(i) द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर । इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए ।

Ans. द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।इस कथन का भाव यह है कि द्रौपदी की लाज बचाते हुए कृष्ण ने कौरवों की सभा में द्रौपदी चीर हरण के समय द्रौपदी का चीर बढ़ाकर उसकी सहायता की थी। इस पद में हरि से अपनी पीड़ा को हरने की विनती करती हुई मीरा चाहती है कि उसी प्रकार अपनी इसी मर्यादा के अनुरूप ही हरि उनकी पीड़ा का भी हरण कर लें।

(ii) पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं? पर्वत प्रदेश में पावस कविता के आधार पर लिखिए।

Ans. (ii) कविता के अनुसार पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष शांत और चिंतित होकर एकटक आकाश की ओर देख रहे थे क्योंकि उनमें और ऊँचा उठने की कामना थी। कवि ने इन्हें मनुष्य की महत्वाकांक्षाओं के लिए प्रतिबिम्बित किया है। जिस प्रकार मनुष्य की महत्वाकांक्षाओं का अंत नहीं होता है, उसी प्रकार ये भी ऊँचा उठना चाहते हैं।

(iii) भाव स्पष्ट कीजिए-

खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर

इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई

Ans. सैनिक अपने देश की युवा शक्ति का आह्वान करते हुए, पौराणिक कथा के माध्यम से उन्हें देश की रक्षा हेतु बलिदान देने के लिए उत्साहित व प्रेरित करता है। वह कहता है कि अपनी सीमाओं पर अपने खून से ऐसी लकीर खींच दो कि किसी रावणको उस लक्ष्मण रेखाको पार करने के लिए कई बार सोचना पड़े अर्थात् सुरक्षा का घेरा बना दो कि यदि कोई भी विदेशी ताकत इस सीमा का अतिक्रमण करे तो उसे उचित जवाब दो जिससे फिर कोई भारतमाता के आँचल को मलिन करने का दुस्साहस न कर सके। सैनिक युद्ध में इसी प्रकार अपना रक्त बहाकर लकीर खींचते हैं और देश को दुश्मनों से बचाते हैं।

(iv) आत्मत्राण कविता की आपको क्या बात सबसे अच्छी लगी? विस्तार सहित लिखिए।

Ans. आत्मत्राणकविता की कुछ पंक्तियाँ, जो मुझे अच्छी लगी, निम्नलिखित हैं-

■ “हे प्रभु! मेरे दुखों को दूर मत करना ।

मुझे केवल इतनी शक्ति देना कि मैं उन दुखों को सहन कर सकूं।

मुझे मेरे कर्मों का फल भोगने की शक्ति देना ।

ये पंक्तियाँ मुझे इसलिए अच्छी लगी क्योंकि ये हमें जीवन के कठिन समय में भी हार न मानने की प्रेरणा देती है। ये हमें सिखाती है कि दुख जीवन का एक हिस्सा हैं और हमें उनसे भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। ये हमें ईश्वर पर विश्वास करने और उनसे शक्ति प्राप्त करने की प्रेरणा देती है। इन पंक्तियों में कवि का संदेश स्पष्ट है कि हमें दुखों से डरना नहीं चाहिए, बल्कि

खंड ग संचयन (पूरक पाठ्यपुस्तक)

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में दीजिए:

(i) हरिहर काका कहानी के आधार पर लिखिए कि रिश्तों की नींव मजबूत बनाने के लिए किन गुणों की आवश्यकता है और स्पष्ट कीजिए कि ऐसा क्यों जरूरी है?

Ans. हरिहर काकाकहानी के आधार पर रिश्तों की नींव मज़बूत करने के लिए अनेक गुणों की आवश्यकता होती है। सामाजिक या पारिवारिक रिश्तों को मज़बूती प्रदान करने के लिए आदमी को निज की भावना से ऊपर उठना होता है। आधुनिक परिवर्तित समाज तथा रिश्तों में बदलाव आ रहा है। उनमें स्वार्थ लोलुपता बढ़ती जा रही है। कथावस्तु के आधार पर हरिहर काका एक वृद्ध निःसंतान व्यक्ति हैं, परिवार के सदस्यों को जब लगता है कि काका कहीं अपनी जमीन महंत के नाम न कर दें तब वे उनकी सेवा करने लगते हैं। बाद में अपनी स्वार्थ सिद्धि न होती देखकर वे काका के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं। पारिवारिक संबंधों में भ्रातृभाव को बेदखल कर पाँ पसारती जा रही स्वार्थ लिप्सा, हिंसावृत्ति को समाप्त करने के लिए परस्पर सहयोग, सद्भाव और सौहार्द जैसे गुणों की आवश्यकता है जिससे समाज में, रिश्तों में दूरियाँ और विघटन समाप्त हो जाए।

(ii) सपनों के से दिन पाठ के आधार पर बताइए कि अभिभावकों को बच्चों का अधिक खेलकूद करना पंसद क्यों नहीं आता? छात्र जीवन में खेलों का क्या महत्व है? इनसे हमें किन गुणों की प्रेरणा मिलती है?

Ans. प्रायः अभिभावक बच्चों की खेलकूद में ज्यादा रुचि लेने पर इसलिए रोक लगाते हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि बच्चे ज्यादा-से-ज्यादा पढ़ाई करें। परीक्षा में अच्छे अंक लाएँ। वे खेलों में समय लगाने को समय की बरबादी मानते हैं। उन्हें लगता है कि वे खेलों में ही लगे रहेंगे तो वे पढ़ाई नहीं कर पाएँगे। इससे वे उन्नति नहीं कर पाएँगे।

बच्चों के लिए जितनी पढ़ाई आवश्यक है, उतनी ही आवश्यकता खेलों की भी है। खेलों के कारण उनके जीवन में रुचि बढ़ती है। खेलों से मानसिक शक्ति तथा अच्छे स्वास्थ्य का विकास होता है। मन में साहस, हिम्मत, अनुशासन प्रियता और सहनशीलता आती है। अतः खेल जीवन के लिए जरूरी है।

(iii) टोपी शुक्ला पाठ के आधार पर लिखिए कि इफ़्फ़न के पिता के तबादले के बाद टोपी शुक्ला बूढ़ी नौकरानी सीता के नज़दीक क्यों चला गया।

Ans. टोपी शुक्ला को सदैव अपने परिवारजनों से प्रताड़ना और उपेक्षा ही मिली। अपने भरेपूरे घर में भी वह अकेला था। परिवार के किसी भी सदस्य को उसकी परवाह नहीं थी। कभी उसकी दादी उस दुत्कारती तो कभी माँ के द्वारा उसे ही गलत समझा जाता। उसके पिता अपने काम में ही लगे रहते और उसका बड़ा भाई उसके साथ हमेशा नोकरों के समान व्यवहार करता। अपने ही घर में उपेक्षित होने पर उसका मन घर की बूढ़ी नौकरानी सीता के प्रति खिंचने लगा क्योंकि सीता की भी घर में कोई परवाह नहीं करता था। उसे भी दुत्कारा जाता। उसके मन में टोपी के प्रति प्रेम और सहानुभूति थी इसलिए टोपी सीता के नज़दीक चला गया।

खंड घ- रचनात्मक लेखन

12. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखियेः

(i) मेरा प्रिय खेल बैडमिंटन विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए |

संकेत- बिंदु

■ बैडमिंटन ही प्रिय क्यों

■ खेल भावना

■ मेरी ताक़त

Ans. बैडमिंटन मेरा सबसे प्रिय खेल है। इसकी गति और रोमांच मुझे बेहद पसंद है। शटलकॉक को रैकेट से मारना और उसे हवा में उछालना मेरे लिए एक मज़ेदार अनुभव है। बैडमिंटन खेलने से न केवल शारीरिक फिटनेस बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है।

बैडमिंटन खेलते समय खेल भावना का होना बहुत जरूरी है। जीत-हार से ज्यादा महत्वपूर्ण है खेल का मजा लेना। इस खेल ने मुझे धैर्य, अनुशासन और टीम वर्क का महत्व सिखाया है। बैडमिंटन में मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरी गति और चपलता है। मैं जल्दी से एक जगह से दूसरी जगह जा सकता हूँ और शटलकॉक को आसानी से पकड़ सकता हूँ। इस खेल ने मुझे कई प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका दिया है और मुझे कई नए दोस्त बनाने में भी मदद की है।

(ii) कमरतोड़ महँगाई विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दो में अनुच्छेद लिखिए।

Ans. वर्तमान समय में निम्न मध्यम वर्ग महँगाई की समस्या से त्रस्त है। महँगाई भी ऐसी, जो रुकने का नाम ही नहीं लेती, बढ़ती ही चली जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का महँगाई पर कोई नियन्त्रण रह ही नहीं गया है। महँगाई बढ़ने के कई कारण हैं। उत्पादन में कमी तथा माँग में वृद्धि होना महँगाई का प्रमुख कारण है। कभी-कभी सूखा, बाढ़ तथा अतिवृष्टि जैसे प्राकृतिक प्रकोप भी उत्पादन को प्रभावित करते हैं। वस्तुओं की जमाखोरी भी महँगाई बढ़ने का प्रमुख कारण है। जमाखोरी से शुरू होती है कालाबाजारी, दोषपूर्ण वितरण प्रणाली तथा अन्धाधुन्ध मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति । सरकारी अंकुश का अप्रभावी होना महँगाई तथा जमाखोरी को बढ़ावा देता है। सरकार अखबारों में तो महँगाई कम करने की बात करती है। पर वह भी महँगाई बढ़ाने में किसी से कम नहीं है। सरकारी उपक्रम भी अपने उत्पादों के दाम बढ़ाते रहते हैं। इस जानलेवा महँगाई ने आम नागरिकों की कमर तोड़कर रख दी है। अब उसे दो जून की रोटी जुटाना तक कठिन हो गया है। पौष्टिक आहार का मिलना तो और भी कठिन हो गया है। महँगाई बढ़ने का एक कारण यह भी है कि हमारी आवश्यकताएँ तेजी से बढ़ती चली जा रही हैं, अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम किसी भी दाम पर वस्तु खरीद लेते हैं। इससे जमाखोरी और महँगाई को बढ़ावा मिलता है। महँगाई को सामान्य व्यक्ति की आय के सन्दर्भ में देखा जाना चाहिए । महँगाई के लिए अन्धाधुन्ध बढ़ती जनसंख्या भी उत्तरदायी है। इस पर भी नियन्त्रण करना होगा। महँगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। 80 से 100 रुपए किलो की दाल आम आदमी खरीदकर भला कैसे खा सकता है। सरकार को खाद्य महँगाई पर प्रभावी अंकुश लगाना परमावश्यक है जिससे आम आदमी को राहत मिल सके।

(iii) जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए। संकेत बिंदु:

■ जीवन और संघर्ष क्या है?

■ संघर्ष : सफलता का मूलमंत्र.

■ असफलता से उत्पन्न निराशा और उत्कट जिजीविषा

■ जीवन का मूलमंत्र

Ans. जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है

जीवन “संघर्ष” का दूसरा नाम है।

संन्यास संघर्ष से भागने का नाम है।

जिंदा मनुष्य बनकर जीना चाहते हो तो

संघर्षों में जीना सीखना ही होगा।

जन्म से मृत्यु तक की यह कालावधि जीवन कहलाती है। संघर्ष जीवन में चीज़ों को प्राप्त करने के लिए प्रतिकार है। यह हमें उत्साह और साहस प्रदान करता है। जीवन संघर्ष, व्यक्ति के जीवन में आने वाली चुनौतियों और परिस्थितियों का सामना करने का प्रकार है। इसमें यथार्थता, संघर्षी भावना, समर्थन, और जीवन के मौलिक मूल्यों के प्रति समर्पण शामिल होता है। यह असफलता से सीखने और पुनः प्रयास करने को प्रेरित करता है, साथ ही सफलता की खुशियों को भी स्वीकारता है । जीवन संघर्ष व्यक्ति को सामर्थ्यवान बनाता है और उसे उन्नति और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इससे व्यक्ति का अनुभव, समझदारी, और धैर्य का विकास होता है, जिससे उसे जीवन की हर मुश्किलात से निपटने की क्षमता मिलती है। जीवन संघर्ष हमें अपनी हढ़ता और निर्णायक योजनाओं से परिचित कराता है जिससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और सामाजिक समृद्धि और संतुष्टि के साथ जीवन का आनंद उठा सकते हैं।

13. आप विद्यालय के सांस्कृतिक सचिव हैं; विद्यालय की रंग-मंडली द्वारा प्रस्तुत नाटक को देखने और उसके बाद श्रेष्ठ अभिनेताओं को पुरस्कृत करने का आग्रह करते हुए शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर अनुरोध कीजिए।

Ans.

प्रिय शिक्षा निदेशक जी,

सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय की रंग-मंडली द्वारा प्रस्तुत नाटक की उत्कृष्टता को देखते हुए, कृपया आप इसे देखने का कष्ट करें। यह नाटक हमारे छात्रों की प्रतिभा और मेहनत का परिणाम है और इसका मंचन बहुत प्रभावशाली रहा। नाटक के बाद, श्रेष्ठ अभिनेताओं को पुरस्कृत करने का विचार हमारे विद्यार्थियों की प्रेरणा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपकी उपस्थिति और प्रोत्साहन से न केवल उनकी मेहनत की सराहना होगी, बल्कि अन्य छात्रों को भी प्रेरणा मिलेगी । कृपया इस अवसर को साकार करने में हमारी सहायता करें।

सधन्यवाद,

तुषार सिंह

सांस्कृतिक सचिव

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल विद्यालय नं. 2,

पालम कॉलोनी, दिल्ली-110045

अथवा

अपने प्रधानाचार्य को कारण सहित सेक्शन बदलने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखिए ।

Ans. प्रधानाचार्य महोदय,

ग्रीन वुड पब्लिक स्कूल,

जयपुर, राजस्थान।

01 मार्च, 2019

विषय- सेक्शन बदलवाने के संबंध में मान्यवर,

सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की नौवीं का छात्र हूँ। इस विद्यालय का अच्छा शैक्षणिक वातावरण तथा उत्तम परीक्षाफल देखकर मैंने यहाँ प्रवेश लिया था। यहाँ अन्य विषयों के साथ मैंने अंग्रेजी पाठ्यक्रम का चुनाव किया, किंतु अंग्रेजी विषय में कमज़ोर होने के कारण पाठ्यक्रम मुझे समझ में नहीं आ रहा है। मैं कक्षा में अध्यापक के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाता हूँ। मासिक टेस्ट में मेरे अंक बहुत खराब थे। मैंने कोशिश तो की पर स्थिति वही ढाक के तीन पातवाली रह गई। इस कक्षा के सेक्शन में अंग्रेजी का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। मैंने अपने मित्र की पुस्तकें देखकर जाना कि पाठ्यक्रम आसान है, जिसे मैं आसानी से पढ़ सकता हूँ। यह पाठ्यक्रम पढ़ने के लिए मैं अपना सेक्शन बदलवाना चाहती हूँ।

आपसे प्रार्थना है कि मेरी कठिनाइयाँ देखते हुए मुझे नौंवी से नौवीं में स्थानांतरित करने की कृपा करें, जिससे मैं अपनी पढ़ाई सुगमता से जारी रख सकें। आपकी इस कृपा के लिए मैं आपका आभारी रहूँगा ।

सधन्यवाद ।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,

सचिन बंसल

14. अभिषेक वर्मा, दिल्ली पब्लिक विद्यालय के हेड ब्वाय की ओर से सुनामी पीड़ितों के लिए धनराशि दान करने हेतु 25-30 शब्दों में सूचना लिखिए।

Ans.

अथवा

आप केन्द्रीय विद्यालय की सुचेता हैं। आप दसवीं कक्षा की छात्रा हैं। विद्यालय में आपका परीक्षा प्रवेश-पत्र खो गया है। विद्यालय सूचना-पट के लिए लगभग 50 शब्दों में एक सूचना लिखिए।

Ans.

15. देश की जनता को मतदान अधिकार के प्रति जागरूक करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त कार्यालय की ओर से लगभग 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए ।

Ans.

अथवा

पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन 25-50 शब्दों में तैयार कीजिए ।

Ans.

16. ई-मेल द्वारा किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को लगभग 80 शब्दों में सूचित कीजिए कि आपके निवास स्थान के आसपास अधिक वर्षा के कारण बाढ़ का सा माहौल बन गया है।

भराव से मुक्ति के लिए तुरंत सहायता अपेक्षित है।

Ans.

अथवा

परीक्षा संकट में फंसा बेचारा विद्यार्थी विषय पर लगभग 100-120 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए।

Ans.