Hindi A (002)
Class IX (2024-25)
निर्धारित समय: 3 hours अ धिकतम अंक: 80
सामान्य निर्देशः
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका सख्ती से अनुपालन कीजिए :
• इस प्रश्नपत्र में कुल 15 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
• इस प्रश्नपत्र में कुल चार खंड हैं- क, ख, ग, घ ।
• खंड-क में कुल 2 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 10 है।
• खंड-ख में कुल 4 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 20 है। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए 16 उपप्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है ।
• खंड-ग में कुल 5 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 21 है।
• खंड-घ में कुल 4 प्रश्न हैं, सभी प्रश्नों के साथ उनके विकल्प भी दिए गए हैं।
• प्रश्नों के उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए लिखिए ।
खंड क – अपठित बोध
1. निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
समय परिवर्तनशील है। जो आज हमारे साथ नहीं है कल हमारे साथ होगा और हम अपने दुःख और असफलता से मुक्ति पा लेंगे यह विचार ही हमें सहजता प्रदान कर सकता है। हम दूसरे की सम्पन्नता, ऊँचा पद और भौतिक साधनों की उपलब्धता देखकर विचलित हो जा हैं कि यह उसके पास तो है किन्तु हमारे पास नहीं है। यह हमारे विचारों की गरीबी का प्रमाण है और यही बात अन्दर विकट असहज भाव का संचालन करती है।
जीवन में सहजता का भाव न होने के वजह से अधिकतर लोग हमेशा ही असफल होते हैं। सहज भाव लाने के लिए हमें एक तो नियमित रूप से योगासन-प्राणायाम और ध्यान करने के साथ ईश्वर का स्मरण अवश्य करना चाहिए। इसमें हमारे तन-मन और विचारों के विकार बाहर निकलते हैं और तभी हम सहजता के भाव का अनुभव कर सकते हैं। याद रखने की बात है कि हमारे विकार ही अन्दर हैं। ईर्ष्या -द्वेष और परनिंदा जैसे दुर्गुण हम अनजाने में ही अपना लेते हैं और अंततः जीवन में हर पल असहज होते हैं और उससे बचने के लिए आवश्यक है कि हम आध्यात्म के प्रति अपने मन और विचारों का रुझान रखें।
1. अधिकतर लोग हमेशा ही असफल क्यों होते हैं?
(क) जीवन में सहजता का भाव न होने के कारण
(ख) आध्यात्म के प्रति रुझान न होने के कारण
(ग) गरीबी के कारण
(घ) सम्पन्नता, ऊँचा पद और भौतिक साधनों की उपलब्धता के कारण
View AnswerAns. (क) जीवन में सहजता का भाव न होने के कारण
2. असहजता से बचने का क्या उपाय है?
(क) ईर्ष्या -द्वेष और परनिंदा को छोड़कर
(ख) योगासन-प्राणायाम और ध्यान करके
(ग) अधिक धन कमाकर
(घ) आध्यात्म के प्रति रुझान रखकर
View AnswerAns. (घ) आध्यात्म के प्रति रुझान रखकर
3. कौन से विचार हमें सहजता प्रदान कर सकते हैं?
(क) आध्यात्मिक विचार
(ख) परनिंदा के विचार
(ग) धन अर्जन के विचार
(घ) स्वस्थ शरीर के विचार
View AnswerAns. (क) आध्यात्मिक विचार
4. विचारों की गरीबी से लेखक का क्या अभिप्राय है?
View AnswerAns. दूसरे की सम्पन्नता, ऊँचा पद और भौतिक साधनों की उपलब्धि अर्थात सम्पन्नता को देखकर अपना आत्मसंयम खो देना, उनसे ईर्ष्या रखना तथा यह सोचना कि यह उसके पास तो है लेकिन हमारे पास नहीं हैं, ऐसे तुच्छ विचारों को मन में लाना ही विचारों की गरीबी है।
5. हम सहजता का विकास कैसे कर सकते हैं?
View AnswerAns. सहजता के विकास के लिए हमें नियमित रुप से योगासन, प्राणायाम और ध्यान करना चाहिए साथ ही ईश्वर का स्मरण भी अवश्य करना चाहिए। इससे हमारे तन-मन और विचारों में संयम आएगा और विकार बाहर निकलेंगे जिससे हम सहजता का अनुभव कर सकते हैं।
2. निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
तिनका तिनका लाकर चिड़िया
रचती है आवास नया ।
इसी तरह से रच जाता है
सर्जन का आकाश नया।
मानव और दानव में यूँ तो
भेद नजर नहीं आएगा।
एक पोंछता बहते आँसू
जी भर एक रुलाएगा।
रचने से ही आ पाता है
जीवन में विश्वास नया।
कुछ तो इस धरती पर केवल
खून बहाने आते हैं।
आग बिछाते हैं राहों में
फिर खुद भी जल जाते हैं।
जो होते खुद मिटने वाले
वे रचते हैं इतिहास नया।
मंत्र नाश को पढ़ा करें कुछ
द्वार-द्वार पर जा करके।
फूल खिलाने वाले रहते ।
घर – घर फूल खिला करके ।
i. नव निर्माण कब सम्भव होता है?
(क) ख़ुद जलकर
(ख) तिनका-तिनका जोड़कर
(ग) राहों में आग बिछा कर
(घ) खून बहाकर
View AnswerAns. (ख) तिनका-तिनका जोड़कर
ii. नया इतिहास कौन बनाते हैं?
(क) दूसरों के लिए जीने वाले
(ख) फूल खिलाने वाले माली
(ग) आग लगाने वाले
(घ) घर घर जाने वाले
View AnswerAns. (क) दूसरों के लिए जीने वाले
iii. ‘घर-घर फूल खिलाने का क्या आशय है?
(क) माली का काम करना
(ख) घर में बगीचे लगाना
(ग) सर्वत्र सुख-शान्ति कायम करना
(घ) घर घर पौंधे बाँटना
View AnswerAns. (ग) सर्वत्र सुख-शान्ति कायम करना
iv. मानव और दानव के बारे में कवि के क्या विचार हैं?
View AnswerAns. मानव और दानव के बारे में कवि का विचार यह है किदोनों में भेद नजर नहीं आता। वे एक समान लगते हैं। इनमें केवल कर्मों का अन्तर होता है। मानव के कर्म अच्छे व आँसू पोछने वाले होते हैं जबकि दानव के कर्म बुरे होते हैं। वह विध्वंश करता है
v. दूसरों के लिए आग बिछाने वालों की क्या दशा होती है?
View AnswerAns. दूसरों के लिए आग बिछाने वाले खुद उसमें जल जाते हैं।
खंड ख – व्यावहारिक व्याकरण
निर्देशानुसार उत्तर लिखिए-
1. निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग करके लिखिए- (किन्ही दो)
i. प्रसाधन
View AnswerAns. प्रसाधन ‘प्र’ उपसर्ग और ‘साधन’ मूल शब्द है।
ii. अभिजात
View AnswerAns. अभिजात =’अभि’ उपसर्ग और ‘जात’ मूल शब्द है।
iii. संसर्ग
View AnswerAns. संसर्ग = ‘सम्’ उपसर्ग और ‘सर्ग’ मूल शब्द है।
II. निम्नलिखित मूल शब्दों में प्रत्यय जोड़कर बनने वाले शब्द लिखिए- (किन्ही दो)
i. मनुष्य + त्व
View AnswerAns. मनुष्य + त्व मनुष्यत्व
ii. चिकना + आहट
View AnswerAns. चिकना + आहट – चिकनाहट
iii. चल + अक
View AnswerAns. चाल + अक चालाक
4. निर्देशानुसार किन्हीं चार प्रश्नों का उत्तर दीजिए और उपयुक्त समास का नाम भी लिखिए।
i. हवन सामग्री (विग्रह कीजिए)
View AnswerAns. हवन सामग्री हवन के लिए सामग्री (चतुर्थी / संप्रदान तत्पुरुष समास)
ii. पुस्तकालय (विग्रह कीजिए)
View AnswerAns. पुस्तकालय = पुस्तकों का आलय / पुस्तकों के लिए आलय (तत्पुरुष समास)
iii. ईश्वर में भक्ति (समस्त पद लिखिए)
View AnswerAns. ईश्वर में भक्ति ईश्वरभक्ति (सप्तमी / अधिकरण तत्पुरुष समास)
iv. अमीर और गरीब (समस्त पद लिखिए)
View AnswerAns. अमीर और गरीब अमीर गरीब (द्वंद्व समास)
v. कमल के समान चरण (समस्त पद लिखिए)
View AnswerAns. कमल के समान चरण चरणकमल (कर्मधारय समास)
5. निर्देशानुसार किन्हीं चार प्रश्नों का उत्तर दीजिए ।
i. मैंने दूध नहीं पिया। (अर्थ के आधार पर वाक्य भेद)
View AnswerAns. निषेधवाचक वाक्य
ii. कृपया बैठ जाइये। (अर्थ के आधार पर वाक्य भेद)
View AnswerAns. आज्ञावाचक वाक्य
iii. मेघा रोटी बनाती है। (आज्ञावाचक वाक्य)
View AnswerAns. मेघा, रोटी बनाओ।
iv. अंश ! पढ़ाई करते रहो। (विधानवाचक वाक्य)
View AnswerAns. अंश पढ़ाई कर रहा है।
v. चंचल शतरंज नहीं खेलती है। (प्रश्नवाचक वाक्य)
View AnswerAns. चंचल शतरंज नहीं खेलती है? अथवा क्या चंचल शतरंज खेलती है?
6. निम्नलिखित काव्यांशों में से किन्हीं चार के अलंकार भेद पहचान कर लिखिए-
i. रावनु रथी विरथ रघुवीरा
View AnswerAns. अनुप्रास अलंकार
ii. मधुर मधुर मुस्कान मनोहर, मनुज वेश का उजियाला
View AnswerAns. अनुप्रास अलंकार
iii. काली घटा का घमंड घटा।
View AnswerAns. यमक अलंकार
iv. रती-रती सोभा सब रती के सरीर के ।
View AnswerAns. यमक अलंकार
v. सीधी चलते राह जो, रहते सदा निशंक जो करते विप्लव, उन्हें, ‘हरि’ का है आतंक
View AnswerAns. श्लेष अलंकार
खंड ग. गद्य खंड (पाठ्यपुस्तक)
7. अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:
जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिहीन समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को परले दराजे का बेवकूफ़ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवकूफ़ है या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। गायें सींग मारती हैं, ब्याई हुई गाय तो अनायास ही सिंहनी का रूप धारण कर लेती है। कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है; किंतु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना, न देखा। जितना चाहो गरीब को मारो, चाहे जैसी खराब, सड़ी हुई घास सामने डाल दो, उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी न दिखाई देगी।
(i) प्रस्तुत गद्यांश में किसके सीधेपन के बारे में बताया गया है?
(क) गधे के
(ग) बैल के
(ख) कुत्ते के
घ) भैंस के
View AnswerAns. (क) गधे के
(ii) किस तरह के आदमी को गधे की संज्ञा दी जाती है?
क) इनमें से कोई नहीं
ख) बुद्धिमान व्यक्ति को
ग) बिल्कुल बुद्धिहीन व्यक्ति को
घ) सीधे-साधे व्यक्ति को
View AnswerAns. ग) बिल्कुल बुद्धिहीन व्यक्ति को
(iii) निरापद सहिष्णुता से क्या अभिप्राय है?
क) बुद्धिहीन व्यक्ति की सहनशीलता
ख) बुद्धिमान व्यक्ति की सहनशीलता
ग) किसी को विपदा में डालने वाली
घ) किसी को विपदा में न डालने सहनशीलता वाली सहनशीलता
View AnswerAns. घ) किसी को विपदा में न डालने सहनशीलता वाली सहनशीलता
(iv) किस जानवर को कभी क्रोध करते न देखा और न सुना गया?
(क) गधे को
ख) कुत्ते को
ग) गाय को
घ) बैल को
View AnswerAns. (क) गधे को
(v) निरापद में कौन-सा उपसर्ग है?
(क) निर्
ख) निरा
(ग) निर
घ) नि
View AnswerAns. (क) निर्
8. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए:
(i) सुमति के यजमान और अन्य परिचित लोग लगभग हर गाँव में मिले। इस आधार पर आप सुमति के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का चित्रण कर सकते हैं?
View AnswerAns. सुमति के यजमान और उनके परिचित हर गाँव में लेखक को मिले। इससे सुमति के व्यक्तित्व की अनेक विशेषताएँ प्रकट होती हैं, जैसे-
i. सुमति मिलनसार एवं हँसमुख व्यक्ति हैं।
ii. सुमति वहाँ के लोगों के लिए धर्मगुरु के समान हैं, जो उन्हें बोधगया से लाए गंडे दिया करते हैं। iii. वे समय के पाबंद हैं इसलिए लेखक के समय पर न पहुँचने पर वे नाराज़ होते हैं।
iv. वे स्वभाव से लालची प्रवृत्ति के हैं । बोधगया से लाए गंडे समाप्त हो जाने पर वे साधारण कपड़े गंडे बनाकर अपने यजमानों को देकर उनसेन प्राप्त करते हैं।
v. सुमति बौद्ध धर्म में आस्था रखते थे।
vi. उन्हें तिब्बत की भौगोलिक स्थिति का अच्छा ज्ञान था।
vii. वे आतिथ्य सत्कार में कुशल थे। उन्होंने लेखक का इंतज़ार करते हुए चाय को तीन बार गर्म किया और अकेले चाय नहीं पी |
(ii) आशय स्पष्ट कीजिए- सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।
View AnswerAns. सालिम अली ने अपना सारा जीवन पक्षियों की सुरक्षा और उनके बारे में नवीन जानकारियाँ एकत्रित करने में बिता दिया था। वे पक्षियों की खोज में न तो किसी स्थान विशेष तक सीमित रहे और न ही उन्होंने स्वयं को किसी सीमा में कैद किया। वे टापू की तरह सूक्ष्म विचारों वाले नहीं बल्कि सागर की तरह खुले आचार-विचार और सोच वाले थे। वे पक्षी, प्रकृति और पर्यावरण के लिए कुछ भी करने को तैयार थे।
(iii) ‘मेरे बचपन के दिन पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए ।
View AnswerAns. मेरे बचपन के दिन पाठ में लेखिका वर्मा ने स्मृतियों के सहारे कई रोचक घटनाओं का वर्णन किया है। उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों से आने वाली पीढ़ी को अवगत कराया । लेखिका ने तत्कालीन समाज के साथ-साथ अपने परिवार में स्त्री की स्थिति का चित्रण किया है। उन्होंने अपने शिक्षित परिवार के साथ-साथ घर के धार्मिक और सद्भावनापूर्ण वातावरण का भी चित्रण किया है। उस समय देश में सांप्रदायिकता के लिए कोई स्थान नहीं था | सभी छात्राएँ एक साथ हिंदी-उर्दू पढ़ती थीं तथा एक साथ खाना खातीं और एक ही प्रार्थना करती थीं। वे राष्ट्रीय आंदोलन में भी अपनी सामर्थ्य से अधिक योगदान दिया करती थीं। जवारा के नवाब की पत्नी तथा लेखिका की माँ सद्भावपूर्ण मेल-जोल आज की सांप्रदायिक भावना पर करारा प्रहार करते हैं।
अतः इस पाठ का प्रमुख उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी के मन में मेलजोल की भावना को मजबूत करना है | साथ ही पाठ हमें सांप्रदायिक सद्भाव से जुड़कर तथा राष्ट्रीय एकता को समृद्ध करने की प्रेरणा देता है | इस प्रकार हम अपनी स्वतंत्रता के प्रति सजग रहकर देश की सुरक्षा के लिए तन- मन-धन से अपने प्राण न्योछावर करने का संकल्प ले सकते हैं।
(iv) गंदे-से-गंदे आदमी की फोटो भी खुशबू देती है’ के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?
View AnswerAns. इस वाक्य के माध्यम से लेखक ने समाज में व्याप्त दिखावे और फैशन की प्रवृत्ति पर व्यंग्य किया है । वे कहते हैं कि लोग तो फोटो खिंचवाने के लिए कपड़े, टाई, जूते और यहाँ तक की पत्नी तक उधार मांग लेते हैं। बाल सेट करवाते हैं, इत्र छिड़कते हैं ताकि फोटो में से खुशबू आए। अपनी फोटो खिंचाते समय वे अपने बैठने का ढंग, मुख, मुद्रा आदि का विशेष ध्यान रखते हैं, जिससे उनकी फोटो अच्छी आए।
खंड ग काव्य खंड (पाठ्यपुस्तक)
9. अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:
मानसरोवर सुभर जल, हंसा केलि कराहिं ।
मुकताफल मुकता चुगें, अब उड़ अनत न जाहिं ।
(i) यहाँ मानसरोवर का प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है?
क) समुद्र के रूप में
ख) एक पवित्र झील के रूप में
ग) एक पवित्र झील के रूप में और पवित्र मन के रूप में दोनों
घ) पवित्र मन के रूप में
View AnswerAns. ग) एक पवित्र झील के रूप में और पवित्र मन के रूप में दोनों
(ii) मानसरोवर में हंस क्या कर रहे हैं?
क) इनमें से कोई नहीं
ख) झील के जल को पीने में मग्न हैं।
(ग) झील के कपर उड़ रहे हैं
घ) दिन-रात कीड़ामन है
View AnswerAns. घ) दिन-रात कीड़ामन है
(iii) पद्योश में हंस किसका प्रतीक है?
क) जीवात्मा का
ख) समय का
ग) एक पक्षी का
घ) मृत्यु का
View AnswerAns. क) जीवात्मा का
(iv) हंस मानसरोवर छोड़कर क्यों नहीं जाना चाहता?
क) क्योंकि उसे कहीं और मोती नहीं मिलेंगे
ख) वह उड़ने में असमर्थ है
ग) क्योंकि क्रीड़ा का ऐसा आनंद उसे कहीं और नहीं आएगा
घ) वह अपनी जन्मभूमि को छोड़कर नहीं जाना चाहता
View AnswerAns. क) क्योंकि उसे कहीं और मोती नहीं मिलेंगे
(v) भक्ति भावना की चरम अवस्था क्या है?
क) आत्मा का परमात्मा में मिलन
ख) भक्ति में लीन हो जाना
ग) परमात्मा के दर्शन होना
घ) मन की पुकार का सुना जाना
View AnswerAns. क) आत्मा का परमात्मा में मिलन
10. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए:
(i) बच्चों को काम पर जाता देखकर आपके मन में जो विचार आते हैं उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।
View AnswerAns. बच्चों को काम पर जाता देखकर हमारे मन में यह विचार आता है कि इस उम्र में बच्चों को काम पर नहीं जाना चाहिए। उन्हें काम करने के बजाय पढ़ने लिखने और खेलने-कूदने का अवसर मिलना चाहिए। यदि उन्हें ऐसे अवसर प्रदान किये जाए तो ये मज़दूर न बनकर योग्य नागरिक बन सकेंगे और समाज व देश की प्रगति में अपना योगदान देने में सक्षम होंगे।
(ii) मिलन के अश्रु ढरके के माध्यम से कवि ने क्या कहना चाहा है? मेघ आए कविता के आधार पर बताइए।
View AnswerAns. गर्मी की मार से मनुष्य, पशु-पक्षी सभी वर्षा होने का बेचैनी से इंतजार कर रहे थे, पर वर्षा में विलंब होता देख सभी के मन में भ्रम की स्थिति बन गई थी कि इस साल वर्षा होगी भी या नहीं | इस इंतजार के बाद जब बादल आए तो विरह व्याकुल लता ने बादल (मेघ) को उलाहने दिए, शिकवे-शिकायतें कीं। गिले-शिकवे दूर हुए। दोनों के मिलन से उनकी आँखों से खुशी के आँसू बह निकले। वे अपनी खुशी न छिपा सके अर्थात् वर्षा होने लगी और खुशी का संचार हो उठा।
(iii) कवयित्री भवसागर पार होने के प्रति चिंतित क्यों है? वाख कविता के आधार पर बताइए ।
View AnswerAns. कवयित्री भवसागर पार होने के प्रति इसलिए चिंतित है क्योंकि वह नश्वर शरीर के सहारे भवसागर पार करने का निरंतर प्रयास कर रही है परंतु जीवन का अंतिम समय आ जाने पर भी उसे अच्छी प्रार्थना स्वीकार होती प्रतीत नहीं हो रही है।
(iv) कवि सुमित्रानंदन पंत ने वसुधा को रोमांचित क्यों कहा है?
View AnswerAns. कवि की दृष्टि में वसुधा एक नायिका के समान है। गेहूँ और जो की बालियाँ, अरहर और सनई की सुनहली फलियाँ, पीले फूलों वाली सरसों की तैलाक्त सुगंध, तितलियों की भाँति रंग-बिरंगे फूलों से सजी-धजी होने के कारण वसुधा रूपी नायिका रोमांचित हो रही है।
खंड ग कृतिका (पूरक पाठ्यपुस्तक)
11. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में दीजिए:
(i) इस जल प्रलय में पाठ के अनुसार लेखक की बाढ़ से घिरे द्वीप पर टहलने की इच्छा अधूरी क्यों रह गई?
View AnswerAns. बाढ़ का पानी जब चारों ओर बढ़ रहा था तब लेखक की इच्छा हुई कि बाढ़ के पानी से घिरे द्वीप पर चलकर कुछ घूम-टहल ले, जिससे उसके पैरों को आराम मिल सके पर द्वीप पर साँप – बिच्छू, चींटी-चींटे, लोमड़ी-सियार आदि जानवरों के अलावा अन्य जीवों ने अपना अस्थाई आश्रय बना लिया था, जिससे लेखक की इच्छा अधूरी रह गई।
(ii) लेखिका मृदुला गर्ग के पिता ने उसे पढ़ने के लिए जो किताब दी थी, उससे लेखिका किस प्रकार प्रभावित हुई?
View AnswerAns. लेखिका के पिता ने उसे ‘ब्रदर्स कारामजोव’ नामक उपन्यास पढ़ने को दिया। यह रूसी उपन्यासकार दास्तोवस्की द्वारा लिखा गया था, जिसमें बच्चों पर किए जाने वाले अत्याचारों का वर्णन था। लेखिका ने इसे कई बार पढ़ा क्योंकि यह उसकी समझ में नहीं आ रहा था। पर उसे बच्चों पर किए जाने वाले अत्याचार वाला प्रसंग पहली बार में ही याद हो गया जो हमेशा उसके साथ रहा। यह उसके लेखन को प्रभावित करता रहा । ‘जादू का कालीन’, ‘नहीं’, ‘तीन किलो की छोरी’, ‘कंठ गुलाब’ आदि उपन्यासों के कई अंशों पर इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
(iii) रीढ़ की हड्डी के आधार पर वर्तमान समाज को उमा जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
View AnswerAns. मेरे विचार से आज हमारे समाज को उमा जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है। उमा स्वाभिमानी लड़की है, वह समाज में व्याप्त रूढ़िवादी परंपराओं के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाली लड़की है। वह स्त्रियों की चेतना तथा स्वतंत्रता के बारे में सोचती है। वह लड़के-लड़कियों में भेद करने वालों को घृणा की दृष्टि से देखती है। उसके पिता गोपाल प्रसाद से उमा की शिक्षा की बात छिपाते हैं, किंतु गोपाल प्रसाद के पूछने पर वह अपनी शिक्षा के बारे में दृढ़तापूर्वक निडरता से बता देती है । इसके विपरीत शंकर स्वयं तो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है, किंतु वह यह नहीं चाहता कि उसकी पत्नी भी पढ़ी-लिखी हो, इसलिए वह कम पढ़ी-लिखी लड़की से विवाह करना चाहता है, किंतु उमा शंकर का विरोध करती हुई उसकी दुर्बल प्रवृत्ति को उजागर करती है। अतः मेरे विचार से आज हमारे समाज को उमा जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है।
खंड घ- रचनात्मक लेखन
12. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखियेः
(i) पर्यटन का महत्त्व विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए।
• पर्यटन का अर्थ
• पर्यटन की ज़रूरत
• हमारे व्यक्तित्व निर्माण में उसकी भूमिका
• देश-समाज को समझने के लिए पर्यटन की आवश्यकता
View AnswerAns. पर्यटन एक ऐसी यात्रा को कहते है जो मनोरंजन या फुरसत के समय का आनंद उठाने के लिए की जाती है। पर्यटन से व्यक्ति को जीवन में एक नई उमंग और उत्साह भर जाता है। जब हम किसी स्थान पर पर्यटन के लिए घूमने के लिए जाते है तो हमें वहाँ की संस्कृति और लोक जीवन के बारे में जानने को मिलता है। हमें इस चीज का एहसास होता है की इस दुनिया में कितनी विवधता है, हमारे और इनके लोक जीवन और संस्कृति में कितना अंतर है। इस से हमारे दिमाग का दायरा बढ़ता है और सोचने समझने की एक गहरी समझ विकसित होती है। पर्यटन से हमें हमारी दैनिक जीवन की परेशानियाँ को भूलकर एक रचनात्मक प्रवृति जागृत होती है, जिस से जीवन में अनेक रास्ते खुल जाते है। अगर हम भारत में प्रमुख पर्यटक स्थलों की बात करे तो ऐसे बहुत से स्थल है जहाँ आप अपनी रुचि और सुविधानुसार जा सकते है। भारत के प्रत्येक राज्य में धार्मिक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक महत्व के पर्यटक स्थल मिल जाएँगे जो भारत की विशाल और प्राचीन विरासत को दर्शाते है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में जहाँ पहाड़ी राज्यों का अपना अलग पर्यटक महत्व हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान अपने थार के मरुस्थल और सम के धोरों के लिए प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश अपने धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। गोवा अपने समुद्री पर्यटन के लिए विख्यात है। भारत में कई ऐसे एतिहासिक पर्यटक स्थल है, जो हमें हमारे गौरवशाली इतिहास को संजोये हुए है, उनमें अनेक दुर्ग, स्मारक और छतरियाँ शामिल है। भारत विश्व का एक प्रमुख पर्यटक केंद्र है। वर्तमान सरकार भारत में पर्यटन के महत्व को समझते हुए अनेक नए कॉरिडोर निर्माण कर रही है। पर्यटन से हमारे रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल रहा है। इस प्रकार पर्यटन का जीवन में बहुत महत्व है।
(ii) करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर 80-100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए।
• परिश्रम का महत्त्व
• प्रतिभा का आधार
• सफलता का रहस्य
View AnswerAns. किसी भी विशेष क्षेत्र या विषय में जीवन में सफल होने के लिए, पूरी प्रतिबद्धता और योजनाबद्ध रणनीतियों के साथ नियमित रूप से अभ्यास करने की आवश्यकता है। सफलता पाना कोई आसान घटना नहीं है; इसके लिए ज्ञान, कौशल और सबसे महत्वपूर्ण है नियमित अभ्यास । यदि आप एक विश्व-स्तरीय प्रसिद्ध संगीतकार बनना चाहते हैं, तो आपको एक उपकरण खरीदने, एक अच्छे शिक्षक की व्यवस्था करने, सीखने और आवश्यक घंटों के लिए दैनिक अभ्यास करने की आवश्यकता है।
कोई शक्ति नहीं है जो आपको केवल जन्मजात कौशल या क्रिकेट के बारे में पूरी जानकारी के माध्यम से कपिल देव या सचिन तेंदुलकर बना सकती है। आप प्रतिबद्ध अभ्यास के बिना लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकते। एक अच्छे और उच्च कुशल कोच के मार्गदर्शन में क्रिकेट का अभ्यास करने के लिए आपको हर दिन घंटों क्रिकेट मैदान में जाना होगा।
आपको उसी काम में पूर्णता लाने के लिए बहुत कम गलतियों का ध्यान रखने की ज़रूरत है जो आप कर रहे हैं और साथ ही साथ अपने मार्गदर्शक का सम्मान करें। यदि हम सफल लोगों की सूची देखते हैं, तो हम देखते हैं कि उनके काम में पूरी प्रतिबद्धता के साथ नियमित अभ्यास और भागीदारी है। बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक या रैंक हासिल करने वाले छात्रों ने पूरे साल योजनाबद्ध टाइम टेबल और खुली आंखों से पढ़ाई की है।
उन्होंने अपने पाठ्यक्रम को संशोधित और पुनः संशोधित किया है और सभी विषयों में खुद को परिपूर्ण बनाया है। नियमित अभ्यास का कोई विकल्प नहीं है जो किसी को भी परिपूर्ण बना सके। अभ्यास के बिना आप केवल औसत प्रदर्शन दे सकते हैं लेकिन किसी भी काम में सही प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। यह शत-प्रतिशत सत्य हैं कि परिश्रम के द्वारा सभी कार्य संभव है। यदि मनुष्य कोई भी काम कठोर परिश्रम से करे तो वो जरूर सफलता प्राप्त करता है।
(iii) सफलता की कुंजी: मन की एकाग्रता विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए।
• भूमिका
• सतत् अभ्यास
• सफलता की कुंजी
View AnswerAns. प्रत्येक कार्य करने के लिए परिश्रम की आवश्यकता होती है। किंतु अगर परिश्रम सार्थक दिशा में पूर्ण रूप से एकाग्र होकर किया जाए तो सफलता शीघ्र मिलती है और किया गया श्रम व्यर्थ नहीं जाता।
किसी भी कार्य को मेहनत से करने के साथ-साथ अभ्यास की भी आवश्यकता होती है। किसी भी कार्य को शुरू में करते समय हमें उसमें अधिक रुचि नहीं होती या फिर थोड़ा-सा कार्य करने के बाद उत्साह समाप्त होने लगता है। किन्तु यदि हम उस कार्य का निरंतर अभ्यास करते रहें तो वह कार्य करना हमारे लिए आसान तो हो ही जाएगा साथ ही मन ही एकाग्रचित होने लगेगा। इसलिए परिश्रम करने तथा चित्त को एकाग्र करने हेतु अभ्यास का होना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी कार्य को करते समय मन का संपूर्ण रूप से उसी कार्य में लगे रहना, मेहनत से विचलित न होना तथा लक्ष्य तक पहुँचने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहना, मन को अन्य कार्यों की तरफ से खींचकर उसी कार्य की पूर्ति के लिए समर्पित रहना एकाग्रता कहलाता है। विद्वानों ने परिश्रम साथ-साथ एकाग्रता को भी सफलता की कुंजी माना है। एकाग्रचित होकर कार्य करने से मेहनत करने में आनंद आता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और सफलता निश्चित ही कदम चूमती है। अतः कहा जा सकता है कि श्रम मानव जीवन के सौन्दर्य को बढ़ाता है किंतु एकाग्रता से किया गया श्रम ही सफलता की कुंजी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने लक्ष्य को एकाग्र होकर साधना चाहिए।
13. आप नवीं कक्षा में पढ़ने वाले आशीष हो । आपने एक कविता लिखी है। इसके प्रकाशन हेतु दैनिक जागरण के संपादक को पत्र लिखिए।
View AnswerAns.
13. संपादक महोदय,
दैनिक जागरण,
एफ ब्लाक, सेक्टर-62,
नोएडा, उत्तर प्रदेश।
दिनांक: 01 मार्च, 2019
विषय- स्वरचित कविता छपवाने के संबंध में
मान्यवर,
निवेदन यह है कि आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के रविवारीय परिशिष्ट्र में स्वरचित कविता प्रकाशनार्थ भेज रहा हूँ। इस कविता में प्रातःकालीन सौंदर्य और प्रातः काल उठकर उपवन में घूमने- फिरने की प्रेरणा निहित है। प्रातः माता-पिता बच्चों के देर तक सोते रहने की शिकायत करते हैं। छुट्टियों के दिन तो वे ऐसा अवश्य करते हैं। मुझे विश्वास है कि यह कविता पढ़कर बच्चों को प्रातःकालीन सौंदर्य देखने की इच्छा उत्पन्न होगी और उनमें सवेरे जल्दी बिस्तर छोड़ने की आदत विकसित होगी।
मेरी यह रचना पूर्णतया मौलिक तथा पूर्व में कहीं भी प्रकाशित नहीं हुई है। इससे पहले मेरी दो रचनाएँ चंदामामा में प्रकाशित हो चुकी हैं। आशा है कि आप रचना को प्रकाशित कर मेरा उत्साहवर्धन करेंगे।
सधन्यवाद ।
भवदीय,
आशीष, 17/पी, कैलाशपुरी,
दिल्ली ।
अथवा
अपने विद्यालय की विशेषताएँ बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।
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पी – 8/276,
बसंत छात्रावास,
लेंसडाउन, देहरादून।
02 मार्च, 2019
प्रिय मित्र गौतम,
सप्रेम नमस्ते ।
तुम्हारा पत्र मिला। पढ़कर बड़ी खुशी हुई। तुमने अपने पत्र में मेरे विद्यालय के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की थी। इस पत्र में मैं तुम्हें अपने विद्यालय की विशेषताएँ लिखकर भेज रहा हूँ। मित्र, मेरा विद्यालय ग्रीनवूड पब्लिक स्कूल देश में प्रसिद्ध है। इस विद्यालय का भवन अत्यंत विशाल, हवादार तथा सुंदर है। इसमें लगभग चार हज़ार बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहाँ पढ़ाई के साथ- साथ खेलकूद तथा छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास पर पूरा बल दिया जाता है। खेल-कूद की व्यवस्था तो बहुत ही अच्छी है जिसमें सभी प्रमुख खेलों के कोच हैं। मैं भी घुड़सवारी और तैराकी का प्रशिक्षण ले रहा हूँ।
यहाँ का प्राकृतिक वातावरण छात्रों को मनभावना लगता है तो प्रधानाचार्य और शिक्षकों का व्यवहार बच्चों को उनके निकट लाता है। वे मृदुभाषी, परिश्रमी और स्नेहपूर्ण व्यवहार करने वाले हैं। विद्यालय का प्रतिवर्ष आनेवाला शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम यहाँ की शिक्षा की गुणवत्ता का प्रमाण है। पत्रोत्तर में तुम भी अपने विद्यालय के बारे में लिखना । शेष सब ठीक है।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
गौरव सिंह
14. आप कोल्हापुर, महाराष्ट्र के निवासी मिलिंद / भुवी हैं। आपके एक परिचित ने आपको दिल्ली से एक पार्सल भेजा जो 25 दिनों बाद भी नहीं मिला। आप कूरियर कंपनी को ईमेल लिखकर शिकायत करते हुए उचित कार्यवाही करने की चेतावनी दीजिए।
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From: Milind55@gmail.com
To: Shelarcouriercompany@gmail.com
विषय- पार्सल न पहुँचने हेतु शिकायत | महोदय,
मेरा नाम मिलिंद है और मैं कोल्हापुर, महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मेरे लिए दिल्ली से एक पार्सल आपकी कंपनी के माध्यम से भेजा था, लेकिन 25 दिनों से अधिक का समय हो गया है और मुझे अभी तक पार्सल नहीं मिला है।
मैं बहुत निराश हूँ क्योंकि इस समय परिस्थिति काफी बदल चुकी है और मेरे लिए पार्सल की सामग्री आवश्यक है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप शीघ्रता से इस मामले का समाधान करें और मुझे मेरा पार्सल जल्द से जल्द पहुँचाएँ।
धन्यवाद,
मिलिंद
अथवा
घमण्डी खरगोश विषय पर एक लघु कथा लिखिए।
View AnswerAns. किसी नदी में मंदबुद्धि नामक एक कछुआ रहता था। एक दिन वह तट पर लेट कर धूप का आनन्द ले रहा था कि तभी एक खरगोश उसके पास आया। दोनों आपस में बातचीत करने लगे। बातों-बातों में दौड़ की बाजी लग गई। दौड़ लगाने के लिए अगले दिन सूर्योदय का समय निर्धारित किया गया। उन्हें दौड़ लगाकर गाँव के बाहर बने एक कुएँ तक पहुँचना था। अगले दिन निश्चित समय पर दौड़ आरम्भ हुई। खरगोश छलांगें लगाता हुआ तेज गति से आगे बढ़ गया और कछुआ अपनी धीमी गति से चलता चला गया। कुछ ही देर के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा तो उसे कछुआ कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। उसने सोचा कि वह धीमी चाल से चलने वाला कछुआ उसका क्या मुकाबला करेगा, क्यों न वह थोड़ी देर घने पेड़ की छाया में विश्राम कर ले। यह सोचकर वह लेट गया और जल्दी ही गहरी नींद में चला गया।
मंदबुद्धि कछुआ निरन्तर चलता चलता जब वहाँ पहुँचा तो उसने खरगोश को गहरी नींद में सोते हुए पाया। कछुआ उसे उसी स्थिति में छोड़कर आगे बढ़ गया। दोपहर बीतने पर खरगोश की आँख खुली तो वह घबराकर सरपट कुएँ की ओर दौड़ा। जब वह गाँव के बाहर निश्चित स्थान पर पहुँचा, तो उसने वहाँ कछुए को विश्राम करते हुए पाया। वह दौड़ हार चुका था। उससे थोड़ी दूरी पर एक लोमड़ी बैठी थी। खरगोश ने पूछा, “लोमड़ी मौसी! मैं कछुए से तेज दौड़ा फिर भी हार गया ।” लोमड़ी ने उत्तर देते हुए कहा-हाँ, खरगोश भाँजे! तुम्हारा घमण्ड तुम्हें ले डूबा। तुमने पहले आराम किया और बाद में काम के बारे में सोचा, जबकि मंदबुद्धि कछुआ निरंतर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ता गया । इसलिए वह दौड़ जीत गया।
सीख – हमें कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए क्योंकि घमण्डी का सिर नीचा होता ही है।
15. देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर मोहित और राहुल दो मित्रों के बीच होने वाले संवाद को लिखिए।
View AnswerAns. मोहित-अरे राहुल! क्या बात है ? इतने उदास क्यों लग रहे हो ?
राहुल क्या बताऊँ मोहित देश में भ्रष्टाचार तो कुकुरमुत्ते की भांति फैलता ही जा रहा है। मोहित – राहुल तुम सच कह रहे हो । भ्रष्टाचार के कारण आज हमारा जीना हराम हो गया है।
राहुल क्या बात है, मोहित, तुम तो मेरी बात सुनकर कुछ ज्यादा ही परेशान हो गए हो। कुछ हुआ है क्या?
मोहित – एक बात है राहुल, तुम बताओ क्या तुम भ्रष्टाचार से त्रस्त नहीं हो? क्या तुम्हारा सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा है?
राहुल- नहीं, यार! ठीक-ठाक क्या चलेगा? बस अपना काम तो कर ही लेता हूँ।
मोहित – क्या? तुम अपना काम कैसे निकालते हो? क्या तुम भी अपना काम निकालने के लिए भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा देते हो।
राहुल- मज़बूरी है यार क्या करूँ?
मोहित – ठीक है तो मेरी तुम्हारी दोस्ती समाप्त ! मैं भ्रष्टाचारियों के साथ नहीं रह सकता।
राहुल – नहीं यार, मैं सबकुछ छोड़ दूँगा तुम्हें नहीं छोड़ सकता! आज से मैं किसी को भी रिश्वत नहीं दूँगा ।
अथवा
कैंटोन अपार्टमेन्ट के चीफ़ सेक्रेटरी की ओर से सोसाइटी में रहने वाले लोगों को जल संरक्षण हेतु सचेत करने के लिए 25-30 शब्दों में एक सूचना लिखिए ।
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