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Class IX – Hindi – B – Paper – 2

निर्धारित समय: 3 hours                                                                                       अधिकतम अंक: 80

सामान्य निर्देशः

• इस प्रश्नपत्र में चार खंड हैं- क, ख, ग और घ

• खंड क में अपठित गदयांश से प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए दीजिए।

• खंड ख में व्यावहारिक व्याकरण से प्रश्न पूछे गए हैं, आंतरिक विकल्प भी दिए गए हैं।

• खंड ग पाठ्यपुस्तक पर आधारित है, निर्देशानुसार उत्तर दीजिए ।

• खंड घ रचनात्मक लेखन पर आधारित है आंतरिक विकल्प भी दिए गए हैं।

• प्रश्न पत्र में कुल 17 प्रश्न हैं, सभी प्रश्न अनिवार्य है।

• यथासंभव सभी खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।

खंड क- अपठित बोध

1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

वह ईंट धन्य है जो कट-छँटकर कंगूरे पर चढ़ती है और हमारा ध्यान अपनी ओर खींचती है। इसके साथ-साथ वह ईंट भी धन्य है जो जमीन के सात हाथ नीचे जाकर नव में गढ़ गई और इमारत की पहली ईंट बनी। उसी ईंट पर इमारत की मजबूती टिकी रहती है। उस ईंट के • हिल जाने से कंगूरा नीचे आ गिरेगा अर्थात् नींव की ईंट अधिक महत्त्वपूर्ण है। उस ईंट ने स्वयं को इसलिये नींव में नीचे डाल दिया ताकि इमारत सौ हाथ ऊपर जा सके, उस ईंट ने अंधे कुएँ में जाना इसलिए स्वीकार किया ताकि ऊपर के लोगों को साफ हवा मिलती रहे, सुनहरी रोशनी मिलती रहे। कुछ स्वतंत्रता सेनानियों ने इसलिए अपना बलिदान दे दिया ताकि आने वाली आजादी का सुख दूसरे लोग भोग सकें। सुन्दर निर्माण के लिए हमेशा बलिदान की आवश्यकता होती है। यह बलिदान चाहे ईंट का हो अथवा व्यक्ति का । सुंदर इमारत बनाने के लिए पक्की-लाल ईंटों को नींव में जाना ही पड़ता है। उसी प्रकार समाज को सुंदर बनाने के लिए कुछ तपे-तपाए लोगों को चुपचाप बलिदान देना ही पड़ता है।

1. कंगूरे का क्या अर्थ है?

(क) नींव

(ख) चोटी, शिखर

(ग) छत, मुँडेर

(घ) ईंट की भट्टी

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Ans. (ख) चोटी, शिखर


2. नींव की ईंट को क्यों धन्य माना गया ?

(क) सुंदर इमारत बनाने के कारण

(ख) सबसे मज़बूत ईंट होने के कारण

(ग) इमारत की पहली ईंट होने के कारण

(घ) इमारत को स्थायित्व देने के कारण

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Ans. (घ) इमारत को स्थायित्व देने के कारण


3. निम्नलिखित में किस शब्द में ‘निर्’ उपसर्ग नहीं है- (क) निर्माण, (ख) नीरव

(क) निर्माण

(ख) नीरव

(ग) दोनों में

(घ) किसी में भी नहीं

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Ans. (ख) नीरव


4. कंगूरे की ईंट और नींव की ईंट में कौन अधिक महत्त्वपूर्ण है? और क्यों ?

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Ans. नींव की ईंट अधिक महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि इमारत की मज़बूती उसी नींव की ईंट पर टिकी रहती है।


5. ‘पक्की-पक्की लाल ईंट’ कह कर लेखक किन्हें उत्साहित कर रहा है?

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Ans. पक्की पक्की लाल ईंट कहकर लेखक युवाओं को उत्साहित कर रहा है। वह उन्हें तपे-तपाये लोग भी कहता है।


2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

सत्संग से हमारा अभिप्राय उत्तम प्रकृति के व्यक्तियों की संगति से है। मानव मन में श्रेष्ठ एवं गर्हित भावनाएँ मिश्रित रूप से विद्यमान रहती हैं। कुछ व्यक्ति सहज सुलभ सद्गुणों की उपेक्षा करके कुमार्ग का अनुगमन करते हैं। उनकी संगति प्रत्येक के लिए भयंकर सिद्ध होती है। वे न केवल अपना ही विनाश करते हैं, अपितु अपने साथ रहने तथा वार्तालाप करने वालों के जीवन और चरित्र को भी पतन अथवा विनाश के गर्त की ओर उन्मुख करते हैं। अतः ऐसे व्यक्तियों की संगति से सदैव बचना चाहिए। विश्व में प्रायः ऐसे मनुष्य ही अधिक हैं जो उत्कृष्ट और निकृष्ट दोनों प्रकार की मनोवृत्तियों से युक्त होते हैं। उनका साथ यदि किसी के लिए लाभप्रद नहीं होता तो हानिकारक भी नहीं होता। इसके अतिरिक्त तृतीय प्रकार के मनुष्य वे हैं जो गर्हित भावनाओं का दमन करके केवल उत्कृष्ट गुणों का विकास करते हैं। ऐसे व्यक्ति निश्चय ही महान प्रतिभा सम्पन्न होते हैं। उनकी संगति प्रत्येक व्यक्ति में उत्कृष्ट गुणों का संचार करती है। उन्हीं की संगति को सत्संग के नाम से पुकारा जाता है।

1. सत्संग से लेखक का क्या अभिप्राय है?

(क) सहज सुलभ व्यक्तियों की संगति को

(ख) उत्तम प्रकृति के व्यक्तियों की संगति को

(ग) भावनाओं का दमन करने वाले की संगति को

(घ) उत्कृष्ट और निकृष्ट दोनों प्रकार के व्यक्तियों की संगति को

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Ans. (ख) उत्तम प्रकृति के व्यक्तियों की संगति को


2. ‘सत्संग’ शब्द का संधि-विच्छेद करिए।

(क) सत् + संग

(ख) सद + संग

(ग) सच + संग

(घ) सत्य + संग

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Ans. (क) सत् + संग


3. इस गद्यांश के अनुसार दो प्रकार की मनोवृत्तियाँ कौन सी हैं?

(क) लाभदायक और हानिकारक

(ख) उत्तम और निम्नतम

(ग) उत्कृष्ट और निकृष्ट

(घ) अच्छी और बुरी

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Ans. (ग) उत्कृष्ट और निकृष्ट


4. कुमार्ग का अनुगमन करने वालों की संगति भयंकर क्यों सिद्ध होती है?

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Ans. कुमार्ग का अनुगमन करने वाले न केवल अपना विनाश करते हैं, अपितु अपने साथ रहने तथा वार्तालाप करने वालों के जीवन और चरित्र को भी पतन अथवा विनाश के गर्त की ओर उन्मुख करते हैं।


5. ‘महान प्रतिभा सम्पन्न’ व्यक्ति किसे कह सकते हैं?

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Ans. वे व्यक्ति जो गर्हित भावनाओं का दमन करके केवल उत्कृष्ट गुणों का विकास करते हैं, ‘महान प्रतिभा-सम्पन्न’ व्यक्ति कहलाते हैं।


खंड ख – व्यावहारिक व्याकरण

3. निम्नलिखित प्रश्नों में से निर्देशानुसार किन्हीं दो प्रश्नों का उत्तर दीजिए

(i) शब्द और वर्ण में अंतर लिखो ?

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Ans. वर्ण ध्वनि की सबसे छोटी इकाई वर्ण कहलाती है ।

शब्द एक या एक से अधिक वर्णों से बनी हुई स्वतंत्र तथा सार्थक ध्वनि शब्द कहलाती है ।

जैसे – क, ल, म, -ये वर्ण हैं जब ये आपस में जुड़ जाते हैं तो कलम इस सार्थक शब्द का निर्माण करते हैं।


(ii) मेरी, बड़ा, लड़की इन शब्दों को को पद के रूप में प्रयोग करें-

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Ans. मेरी लड़की बड़ा मकान बनवा रही है । उपर्युक्त वाक्य में प्रत्येक पद का पद का अलग अर्थ है, यहाँ लड़की कर्ता है और मकान बनवाना कर्म है।


(iii) पाँच ऐसे शब्द लिखिए जो नित्य पुल्लिंग हों?

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Ans. दिनों, ग्रहों, रत्नों, वृक्षों, पर्वतों के नाम हमेशा पुल्लिंग में रहते हैं ।


4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों में उचित स्थान पर अनुस्वार या अनुनासिक का प्रयोग कर उन्हें मानक रूप में लिखिए-

i. अलकार

ii. चचल

iii. बान्ध

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Ans.  i. अलंकार

ii. चंचल 

iii. बाँध


5. निर्देशानुसार उत्तर लिखिए-

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग करके लिखिए- (किन्ही दो)

i. अनावश्यक

ii. विभिन्न

iii. परिस्थिति

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Ans. i. अनावश्यक = अन्उपसर्ग और आवश्यकमूल शब्द है। 

ii. विभिन्न = विउपसर्ग और भिन्नमूल शब्द है ।

iii. परिस्थिति = ‘परि’ उपसर्ग और ‘स्थिति’ मूल शब्द है।


निम्नलिखित मूल शब्दों में प्रत्यय जोड़कर बनने वाले शब्द लिखिए- (किन्ही दो)

i. थक + आवट

ii. पूज् + आपा

iii. लड़ + आई

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Ans. प्रत्यय

i. थक + आवट = थकावट 

ii. पूज + आपा पूजापा 

iii. लड़ + आई = लड़ाई


6. निर्देशानुसार किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

i. दिवस + अन्त (संधि कीजिए)

ii. जल + आगम (संधि कीजिए)

iii. सेवार्थ (संधि-विच्छेद कीजिए)

iv. वार्त्तालाप (संधि-विच्छेद कीजिए)

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Ans.  i. दिवसान्त

ii. जलागम

iii. सेवा + अर्थ

iv. वार्त्ता + आलाप


7. निम्नलिखित वाक्यों में से किन्ही दो में उचित स्थान पर सही विराम चिह्न लगाइए-

i. भरत दशरथ के पुत्र तपस्वी थे

ii. इस बालक पर यह कहावत लागू होती है होनहार बिरवान के होत चीकने पात

iii. सुबह सुबह कौवा काँव काँव करने लगा।

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Ans. i. भरत (दशरथ के पुत्र) तपस्वी थे।

ii. इस बालक पर यह कहावत लागू होती है, ‘होनहार बिरवान के होत चीकने पात।

iii. सुबह-सुबह कौवा काँव-काँव करने लगा।


8. निर्देशानुसार किन्हीं तीन प्रश्नों का उत्तर दीजिए ।

i. शायद वह यहाँ आ गया। (अर्थ के आधार पर वाक्य भेद)

ii. सड़क पर नियमों का पालन करना चाहिये। (अर्थ के आधार पर वाक्य भेद)

iii. शायद आज पिताजी आएँगे। (इच्छावाचक वाक्य)

iv. काश ! तुम कल आते। (प्रश्नवाचक वाक्य)

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Ans. i. संदेहवाचक वाक्य अथवा संभावनार्थक वाक्य

ii. आज्ञावाचक वाक्य

iii. काश ! पिताजी आज आ जाएँ। 

iv. तुम कल आओगे?


खंड ग – गद्य खंड (पाठ्यपुस्तक)

9. अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:

23 मई, 1984 के दिन दोपहर के एक बजकर सात मिनट पर मैं एवरेस्ट की चोटी पर खड़ी थी। एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली मैं प्रथम भारतीय महिला थी। एवरेस्ट शंकु की चोटी पर इतनी जगह नहीं थी की दो व्यक्ति साथ-साथ खड़े हो सकें। चारों तरफ हजारों मीटर लंबी सीधी ढलान को देखते हुए हमारे सामने प्रश्न सुरक्षा का था। हमने पहले बर्फ के फावड़े से बर्फ की खुदाई कर अपने आपको सुरक्षित रूप से स्थिर किया। इसके बाद, मैं अपने घुटनों के बल बैठी, बर्फ पर अपने माथे को लगाकर मैंने ‘सागरमाथे’ के ताज का चुंबन लिया। बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। मैंने इनको अपने साथ लाए लाल कपड़े में लपेटा, छोटी-सी पूजा-अर्चना की और इनको बर्फ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में मुझे अपने माता-पिता का ध्यान आया।

(i) लेखिका ने एवरेस्ट पर पहुँचकर सबसे पहले क्या किया?

क) अपने भाग्य को सराहा

ख) अपने साथियों का धन्यवाद किया

ग) एवरेस्ट की बर्फ को माथे से लगाया

घ) झंडा फहराया

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Ans. ग) एवरेस्ट की बर्फ को माथे से लगाया


(ii) एवरेस्ट के शिखर की क्या स्थिति थी?

क) वहाँ हवा अधिक ठंडी नहीं थी

ख) वहाँ इतना कम स्थान था कि दो व्यक्ति एक साथ खड़े नहीं हो सकते थे

ग) वहाँ बहत विस्तृत स्थान था

घ) वहाँ बहुत सी झाड़ियाँ खड़ी थीं

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Ans. ख) वहाँ इतना कम स्थान था कि दो व्यक्ति एक साथ खड़े नहीं हो सकते थे


(iii) लेखिका एवरेस्ट पर चढ़ने वाली कौन-सी महिला बनी?

क) चौथी

ख) पहली

ग) तीसरी

घ) दूसरी

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Ans. ख) पहली


(iv) लेखिका ने हनुमान चालीसा को कहाँ रखा?

क) बेस कैंप में रख दिया

ख) अपने झंडे के ऊपर रख दिया

ग) तेनजिंग के कमरे में रख दिया

घ) बर्फ के नीचे दबा दिया

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Ans. घ) बर्फ के नीचे दबा दिया


(v) आनंद के क्षण में लेखिका को किसका ध्यान आया?

क) अपने मित्र का

ख) अपने गुरु का

ग) अपने माता-पिता का

घ) अपने सहयोगी का

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Ans. ग) अपने माता-पिता का


10. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए:

(i) दुःख का अधिकार पाठ के आधार पर बताइए पोशाक हमारे लिए कब बन्धन और अड़चन बन जाती है?

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Ans. जब हम अपने से कम हैसियत रखने वाले मनुष्य के साथ बात करते हैं तो हमारी पोशाक हमें ऐसा नहीं करने देती। हम स्वयं को बड़ा मान बैठते हैं और सामने वाले को छोटा मानकर उसके साथ बैठने तथा बात करने में संकोच का अनुभव करते हैं।


(ii) लेखक के मन में अतिथि को ‘गेट आउट’ कहने की बात क्यों आई?

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Ans. चार दिन की मेहमान नवाज़ी के पश्चात् लेखक की सहनशीलता जवाब दे गई, वह सोचने लगा कि अतिथि को शराफ़त से लौट जाना चाहिए अन्यथा ‘गेट आउट’ भी एक वाक्य है, जो इसे बोला जा सकता है।


(iii) कॉलेज के दिनों में रामन् की दिली इच्छा क्या थी?

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Ans. रामन् को बचपन से ही प्रत्येक वस्तु के पीछे छिपे वैज्ञानिक रहस्य को जानने की एक भूख स रहती थी। अपने कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने वैज्ञानिक शोधकार्यों में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया। रामन् की दिली इच्छा थी कि वे नए-नए प्रयोग करें एवं अपना पूरा जीवन शोधकार्यों में लगा दें। इसे कैरियर रूप में अपनाने के लिए उसके पास कोई व्यवस्था नहीं थी और इसी कारण उन्हें सरकारी नौकरी करनी पडी जोकि बाद में शोध कार्य के लिए छोड़ भी दी।


(iv) गांधी जी से मिलने आनेवालो के लिए महादेव भाई क्या करते थे? शुक्र तारे के समान पाठ के आधार पर लिखिए।

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Ans. गांधीजी के सामने जुल्मों और अत्याचारों की कहानियाँ पेश करने के लिए दल के दल गामदेवी के मणीभवन पर उमड़ते थे। महादेव उनकी समस्याओं को सुनते थे और उनकी बातो की संक्षिप्त टिप्पणियाँ तैयार करके गांधीजी के सामने पेश करते थे। साथ ही आनेवालों के साथ उनकी मुलाकातें भी करवाते थे।


खंडग – काव्य खंड (पाठ्यपुस्तक)

11. अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:

“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय ।

टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय ।।”

(i) रहीम ने प्रेम के बंधन की किससे तुलना की है।

क) धागे से

ख) सूत से

ग) डोरी से

घ) तार से

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Ans. क) धागे से


(ii) एक बार प्रेम संबंध टूटने पर क्या होता है?

क) रिश्ते पहले जैसे हो जाते हैं

ख) रिश्ते मधुर हो जाते हैं

ग) फिर पहले जैसे रिश्ते नहीं रहते

घ) रिश्ते कटु हो जाते हैं

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Ans. ग) फिर पहले जैसे रिश्ते नहीं रहते


(iii) गाँठ पड़ना मुहावरे का क्या अर्थ है?

क) मन का स्वार्थी होना

ख) मन में प्रेम बढ़ना

(ग) मन में भेद आ जाना

घ) मन का मजबूत होना

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Ans. (ग) मन में भेद आ जाना


(iv) प्रेम के संबंधों को किस प्रकार निभाना चाहिए?

क) तटस्थता के साथ

ख) बहुत सावधानी के साथ

ग) झूठ बोलकर

(घ) सच बोलकर

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Ans. ख) बहुत सावधानी के साथ


(v) कवि रहीम के अनुसार प्रेम का धागा क्यों नहीं तोड़ना चाहिए?

क) क्योंकि वह धागा बहुत मजबूत होता है

ख) क्योंकि उसमें गाँठ लगाने से संबंध मजबूत होते हैं

ग) क्योंकि उसमें गाँठ लगाना आसान होता है

घ) क्योंकि एक बार धागा टूट जाने पर उसे जोड़ना कठिन होता है

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Ans. घ) क्योंकि एक बार धागा टूट जाने पर उसे जोड़ना कठिन होता है


12. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए:

(i) भाव स्पष्ट कीजिए- जाकी अँग अँग बास समानी

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Ans. इस पंक्ति का भाव यह है कि भक्त स्वयं गुणों से रहित है। वह पानी के समान रंग-गंध रहित है, लेकिन ईश्वर रूपी चंदन की समीपता पाकर धन्य हो जाता है। वह गुणों की प्राप्ति कर लेता है। जैसे पानी में घिसकर चंदन का रंग निखरता है उसी प्रकार भक्तों की भक्ति से प्रभु का महत्त्व बढ़ जाता है। भक्त और भगवान इतने समीप आ जाते हैं कि भक्त के अंग-अंग में ईश्वर की सुगंध समा जाती है। भक्त का रोम-रोम ईश्वर भक्ति से प्रसन्न हो जाता है।


(ii) जब शुक गाता है, तो शुकी के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है? गीत-अगीत के आधार पर लिखिए।

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Ans. कवि ने यहाँ तोते को शुक कहा है। जब सूर्य की किरणें पत्तों से छनकर तोते पर पड़ती है तो वह गाने लगता है। उसका गीत सुनकर मादा तोता भी गाना चाहती है लेकिन उसका ह्रदय प्यार से ओत-प्रोत हो जाता है और वह अपना गीत नहीं गा पाती, मौन होकर रह जाती है। उसे अपने स्नेह को व्यक्त करने के लिए स्वर नही मिल पाता । शुक का गीत सुनकर शुकी के पंख फूल जाते हैं और वह गीत सुनकर अत्याधिक प्रसन्न हो जाती है।


(iii) अग्निपथ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए ।

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Ans. इस कविता का मूल भाव है निरन्तर संघर्ष करते हुए जियो। कवि जीवन को अग्निपथ अर्थात् आग से भरा पथ मानता है। इसमें पग-पग पर चुनौतियाँ और कष्ट हैं। मनुष्य को इन चुनौतियों से नहीं घबराना चाहिए और इनसे मुँह भी नहीं मोड़ना चाहिए बल्कि आँसू पीकर, पसीना बहाकर तथा खून से लथपथ होकर भी निरन्तर संघर्ष पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।


(iv) खुशबू रचते हैं हाथ कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

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Ans. इस कविता को लिखने का कवि का मुख्य उद्देश्य है निम्न वर्ग की सामाजिक व्यवस्था की दयनीय दशा को उभारना। इस वर्ग की विशेष देखभाल होनी चाहिए, उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। सबका ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाए, ठोस सरकारी कदम उठाने चाहिए, ताकि वह वर्ग भी स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सके।


खंड ग – संचयन (पूरक पाठ्यपुस्तक)

13. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में दीजिए:

(i) गिल्लू कहानी हमारे स्वभाव में जीव प्रेम को किस प्रकार विकसित करती है?

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Ans. गिल्लू कहानी, लेखिका के जीव प्रेम को अभिव्यक्त करती है। लेखिका ने घायल गिलहरी के बच्चे का उपचार कर उसके रहने तथा खाने का अपने घर में प्रबंध किया। अपने परिवार के सदस्य की तरह उसे पाला। थोड़े ही समय में लेखिका और गिल्लू के बीच बड़े ही मधुर संबंध बन गए। इस कहानी से यह संदेश मिलता है कि जीव-जंतुओं को प्यार तथा आत्मीयता से पालकर हम उन्हें घर के सदस्य के समान रख सकते हैं। प्यार में वह ताकत होती है कि बेज़बान जीव-जंतु भी हमें सच्चे अर्थों में परिचारिका की भाँति प्रेम दे सकते हैं। हमारे जीवन के सूनेपन के अभाव को दूर कर सकते हैं। वे हमारे अंदर दया भाव का संचार करते हैं तथा हमें प्रकृति की ओर मोड़ते हैं। इस प्रकार यह कहानी हमारे जीव प्रेम को विकसित करते हुए यह प्रेरणा देती है कि हम अपने प्यार, अपनत्व तथा ममत्व से किसीको मिहीत्र बना सकते है।


(ii) माँ अपनी संतान को दुःखी नहीं देख सकती, माँ का दिल तो आखिर माँ का दिल होता है। इस बात की पुष्टि के लिए मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय पाठ से उदाहरण दीजिए।

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Ans. मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालयपाठ का लेखक इंटरमीडिएट पास करने के बाद आर्थिक तंगी के कारण अपनी पुरानी पाठ्य-पुस्तकें बेचकर बी. ए. की पाठ्य-पुस्तकें लेने एक सेकंड हैंड बुकशॉप पर गया। अपनी पाठ्य-पुस्तकें खरीदने के बाद भी उसके पास दो रुपये बच गए थे, जो उसने अपनी माँ को दे दिए। उन्हीं दिनों वहाँ के सिनेमाघर में देवदासफ़िल्म लगी थी, जिसका एक गाना दुःख के दिन अब बीतत नाहींलेखक को बहुत पसंद था। वह अक्सर इस गाने को गुनगुनाता रहता था और कभी-कभी इस गाने को गुनगुनाते समय उसकी आँखों में आँसू भी आ जाते थे।

एक दिन माँ ने उसके द्वारा इस गाने को गुनगुनाते हुए सुना, तो वह बोलीं-दुःख के दिन बीत जाएँगे बेटा, दिल इतना छोटा क्यों करता है? धीरज से काम ले!जब उन्हें मालूम हुआ कि यह गाना तो देवदासफ़िल्म का है, तो सिनेमा की घोर विरोधी माँ ने उन्हें फ़िल्म देखने की देखने की अनुमति दे दी।

वास्तव में, आर्थिक तंगी के बावजूद बेटे के मन की इच्छा को पूरा करने के लिए माँ ने पैसे की चिंता नहीं की। उनके लिए लेखक का प्रसन्न रहना अधिक महत्त्वपूर्ण था। इसी तरह, लेखक जब छोटा था, तो पाठ्य-पुस्तकों को पढ़ने से बहुत जी चुराता था, लेकिन पिता जी के समझाने के बाद उसने पाठ्य-पुस्तकों को पढ़ने पर ध्यान देना शुरू किया। लेखक जब पाँचवीं कक्षा में प्रथम आया, तो माँ ने आँखों में आँसू भरकर उसे गले से लगा लिया।


(iii) उनाकोटी का अर्थ स्पष्ट करते हुए बतलाएँ कि यह स्थान इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है?

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Ans. त्रिपुरा में एक जगह का नाम उनाकोटी है उनाकोटी का अर्थ होता है एक करोड़ से एक कम इसके बारे में एक दंत कथा प्रसिद्ध है कि कल्लू नाम का एक कुम्हार था उसने भगवान शिव की भक्ति की भगवान के प्रसन्न होने पर उसने भगवान शिव के साथ कैलाश रहने की प्रार्थना की इससे बचने के लिए भगवान शिव ने शर्त रखी कि यदि वह एक रात में भगवान शिव की एक करोड़ मूर्तियाँ बना देगा तो वे उसे अपने साथ कैलाश पर्वत पर रहने की अनुमति प्रदान कर देंगे कल्लू कुम्हार ने मूर्तियाँ बनाना शुरू कर दीं किन्तु सुबह होने पर सारी मूर्ति याँ बन चुकी थीं मगर गिनने पर एक मूर्ति कम निकली और शर्त के अनुसार कल्लू कुम्हार वहीं रह गया इसलिए इस जगह का नाम उनाकोटी पड गया।


खंड घ – रचनात्मक लेखन

14. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखियेः

(i) ग्लोबल वार्मिंग विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए।

■ ग्लोबल वार्मिंग क्या है तथा कैसे होती है?

■ दुष्परिणाम

■ बचाव तथा उपसंहार

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Ans. वैश्विक तापमान यानी ग्लोबल वार्मिंग आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। इससे न केवल मनुष्य, बल्कि पृथ्वी पर रहने वाला प्रत्येक प्राणी त्रस्त है। ग्लोबल वार्मिंगशब्द का अर्थ हैसंपूर्ण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होना ।हमारी पृथ्वी पर वायुमंडल की एक परत है, जो विभिन्न गैसों से मिलकर बनी है, जिसे ओज़ोन परत कहते हैं। ये ओज़ोन परत सूर्य से आने वाली पराबैंगनी तथा अन्य हानिकारक किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। मानवीय क्रियाओं द्वारा ओज़ोन परत में छिद्र हो जाने के कारण सूर्य की हानिकारक किरणें पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर रही हैं।

परिणामस्वरूप पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण कई समुद्री तथा पृथ्वी पर रहने वाले जीव-जंतुओं की प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा छाया हुआ है, साथ ही मनुष्यों को भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि समय रहते ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय नहीं किए, तो हमारी पृथ्वी जीवन के योग्य नहीं रह जाएगी। इसे रोकने के लिए हमें प्रदूषण को कम करना होगा। साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड सहित अन्य गैसों के उत्सर्जन में कमी तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देना होगा, जिससे प्रकृति में पर्यावरण संबंधी संतुलन बना रहे।


(ii) आज की बचत कल का सुख विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए।

■ बचत का अर्थ एवं स्वरूप

■ दुःखदायक स्थितियों में बचत का महत्त्व

■ वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित करना

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Ans.

आज की बचत कल का सुख

वर्तमान आय का वह हिस्सा, जो तत्काल व्यय (खर्च) नहीं किया गया और भविष्य के लिए सुरक्षित कर लिया गया बचतकहलाता है। पैसा सब कुछ नहीं रहा, परंतु इसकी ज़रूरत हमेशा सबको रहती है। आज हर तरफ़ पैसों का बोलबाला है, क्योंकि पैसों के बिना कुछ भी नहीं। आज जिंदगी और परिवार चलाने के लिए पैसे की ही अहम भूमिका होती है। आज के समय में पैसा कमाना जितना मुश्किल है, उससे कहीं अधिक कठिन है। पैसे को अपने भविष्य के लिए सुरक्षित बचाकर रखना, क्योंकि अनाप-शनाप खर्च और बढ़ती महँगाई के अनुपात में कमाई के स्रोतों में कमी होती जा रही है, इसलिए हमारी आज की बचत ही कल हमारे भविष्य को सुखी और समृद्ध बना सकने में अहम भूमिका निभाएगी।

जीवन में अनेक बार ऐसे अवसर आ जाते हैं, जैसे आकस्मिक दुर्घटनाएँ हो जाती हैं, रोग या अन्य शारीरिक पीड़ाएँ घेर लेती हैं, तब हमें पैसों की बहुत आवश्यकता होती है। यदि पहले से बचत न की गई तो विपत्ति के समय हमें दूसरों के आगे हाथ फैलाने पड़ सकते हैं। हमारी आज की छोटी-छोटी बचत या धन निवेश ही हमें भविष्य में आने वाले तमाम खर्चे का मुफ़्त समाधान कर देती हैं। आज की थोड़ी-सी समझदारी आने वाले भविष्य को सुखद बना सकती है। बचत करना एक अच्छी आदत है, जो हमारे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य के लिए भी लाभदायक सिद्ध होती है। किसी ज़रूरत या आकस्मिक समस्या के आ जाने पर बचाया गया पैसा ही हमारे काम आता है। संक्षेप में कह सकते हैं कि बचत करके हम अपने भविष्य को सँवार सकते हैं । जो लोग बचत नहीं करते हैं वे अक्सर पैसे की अनुपस्थिति में रहते हैं। आज, सभी प्रमुख कंपनियां छोटी बचत को प्रोत्साहित करती हैं। सभी प्रमुख कार्यालयों में आर्थिक प्रबंधन के लिए अलग- अलग विभाग होते हैं, जो अपने कार्यालय की आय के साथ बचत का खाता भी रखता है।


(iii) हिन्दी साहित्य की उपेक्षा विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 80 से 100 शब्दो में अनुच्छेद लिखिए।

■ हमारी मातृभाषा

■ पाठकों का घटता रुझान और कारण

■ उपेक्षाभाव दूर करने के उपाय

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Ans. हमारी मातृभाषा – किसी देश की वह भाषा जिसका प्रयोग उस देश के लगभग सभी राज्यों, क्षेत्रों, नगरों और गाँव के लोगों के द्वारा किया जाता है वह मातृ भाषा कहलाती है। हिन्दी भाषा भारत की मातृ भाषा व राष्ट्र भाषा दोनों पदों पर आसीन है। हिंदी भाषा को भारतीय संविधान में भारत की आधिकारिक राष्ट्र भाषा का स्थान प्राप्त है।

पाठकों का घटता रुझान और कारण – स्वतंत्रता के पश्चात् इस भाषा के साहित्यिक पक्ष की लोग उपेक्षा कर रहे हैं। वर्तमान समय में भी इसके साहित्य के प्रति लोगों का रुझान घटता जा रहा है। लोग हिन्दी साहित्य को छोड़कर विदेशी साहित्य के मनोरंजन के प्रधान साधन सिनेमा की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। उन्हें कविताओं के स्थान पर फिल्मी गानों की धुनें अधिक याद रहती हैं। इसकी उपेक्षा के मूल कारण हैं – हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार में कमी, दूरदर्शन पर प्रसारित कार्यक्रमों में इससे संबंधित कार्यक्रमों का अभाव व विद्यालयों में हिन्दी पर कम ध्यान दिया जाना । यदि यही स्थिति रही तो एक दिन हिन्दी साहित्य अपना अस्तित्व खो देगा।

उपेक्षाभाव दूर करने के उपाय – इसके अस्तित्व को बचाने व लोगों में इसके प्रति रूचि बढ़ाने के लिए इसके प्रचार-प्रसार पर अधिक बल देना होगा। दूरदर्शन के कार्यक्रमों में इससे सम्बन्धित कार्यक्रमों को स्थान देना होगा। काव्य गोष्ठियों का आयोजन करना होगा। कवि सम्मेलनों का आयोजन करना होगा व इन सबसे ऊपर कवियों का सम्मान करना होगा तभी हिन्दी साहित्य को पुनः अपना स्थान प्राप्त होगा।


15. आपके विद्यालय में सफाई अभियान चलाया गया जिसमें आपने भी श्रमदान किया। आस- पास के क्षेत्रों की खूब सफाई की गई तथा लोगों को सफाई के महत्त्व के बारे में बताया गया। इन सभी गतिविधियों का वर्णन करते हुए अपनी बड़ी बहन को पत्र लिखिए।

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Ans.

276-P,

पालम, दिल्ली- 77

दिनांक 05.03.2019

पूज्य दीदी,

चरण स्पर्श ।

यहाँ सब ठीक प्रकार से हैं। आशा है आप भी परिवार सहित कुशलपूर्वक होंगी। पता है दीदी, हमारे विद्यालय में आजकल सफाई अभियान चल रहा है। सभी कक्षाओं में नया पेंट किया गया है जिससे दीवारें काफ़ी साफ सुथरी एवं अच्छी लग रही हैं, मैंने व मेरी कक्षा के बच्चों के द्वारा पेंट के समय अपनी कक्षा की मेज कुर्सियों आदि को बाहर निकाला उनकी भी सफाई की गयी एवं उन्हें दुबारा कक्षा में रखकर अच्छी तरह व्यवस्थित कर दिया है। अब सफाई से कक्षाएँ काफी साफ व अच्छी लग रही हैं तथा अब कक्षा में मच्छर आदि भी नहीं हैं। इससे हम सभी बच्चों को सफाई के महत्त्व के बारे में पता चला है तथा अब हम लोग अपने कक्षाध्यापक के साथ थोड़ा-थोड़ा समय निकालकर विद्यालय के बाहर आस-पास की भी सफाई करते हैं तथा श्रमदान करते समय आस-पास की गन्दगी व कूड़े के ढेरों की सफाई करते हैं तथा वहाँ घास व खुशबूदार पौधे लगा देते हैं। जिससे विद्यालय के बाहर आस-पास भी काफ़ी साफ-सफाई रहती है व देखने में काफी अच्छी हरियाली नज़र आती है। अब कीटाणु समाप्त हो गए हैं तथा लोगों के स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ रहा है और दीदी पता है हमारे विद्यालय का चयन जिले के आदर्श विद्यालय के रूप में भी हो गया है व हमारे विद्यालय का निरीक्षण करने आने वाले हमारे विद्यालय व आस-पास की गयी सफाई व हरियाली की प्रशंसा करते हैं।

अच्छा दीदी मेरा सभी को यथा योग्य अभिवादन कहिएगा।

आपका प्रिय भाई,

रोहित


अथवा

आपने हाल में ही किसी पर्वतीय स्थल की यात्रा की, जिसका आपको काफी रोचक अनुभव हुआ। इस अनुभव को बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।

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Ans.

P-275 पालम,

नई दिल्ली।

27 फरवरी, 2019

प्रिय मोहित,

तुम्हारा पत्र मिला। तुम सपरिवार सकुशल हो, यह जानकर प्रसन्नता हुई। तुमने मुझसे मेरी यात्रा के बारे में जानना था, उसी यात्रा का अनुभव मैं इस पत्र में लिखकर भेज रहा हूँ ।

मित्र, मैंने नवंबर महीने के अंतिम सप्ताह में जम्मू स्थित वैष्णों देवी की यात्रा का कार्यक्रम बनाया, जिसके लिए मैंने करीब एक माह पूर्व ही आरक्षण करा लिया था। ट्रेन से जम्मू और वहाँ से बस द्वारा हम सात बजे तक कटरा पहुँच गए। वहाँ से ग्यारह बजे रात्रि में कुछ कपड़े लेकर वैष्णों देवी पैदल चलना प्रारंभ किया। बाण गंगा पार करते ही चढ़ाई में हम अर्धक्कारी, हाथी मत्था, सांझीछत की कठिन चढ़ाई पार करते हुए प्रातः काल वैष्णों देवी पहुँच गए। वहाँ के शीतल जल में स्नान करने से सारी थकान दूर हो गयी। वहाँ दर्शन कर हम दो घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद भैंरो धाम गए। वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य ने मन हर लिया। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पहाड़, उनके पास उड़ते बादल, हरे-भरे पेड़ किसी और ही दुनिया में होने का एहसास करा रहे थे। वहाँ से लौटने की मन नहीं था पर लौटना तो था ही। प्रकृति की गोद में बसे इस स्थान की यात्रा हेतु तुम यदि जाओ तो इसका प्रत्यक्ष अनुभव कर सकोगे। शेष सब ठीक है।

अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना।

तुम्हारा अभिन्न मित्र,

राहुल


16. दिए गए चित्र को देखकर लगभग 100 शब्दों में वर्णन कीजिए।

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Ans. प्रस्तुत चित्र किसी सड़क जाम के दृश्य को प्रदर्शित कर रहा है। जहाँ सभी गाड़ियाँ अस्त-व्यस्त खड़ी हैं। चौराहे पर किसी भी प्रकार के ट्रैफिक सिग्नल की कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही पैदल चल रहे यात्रियों को भी असुविधा हो रही है। जाम भयंकर लगा है तथा किसी पुलिसकर्मी की कोई व्यवस्था नहीं है। दिल्ली में पिछले 10 वर्षों में जनसंख्या दोगुनी हो गई है, जिसके कारण वाहनों की संख्या में वृद्धि होने से एक ओर जाम जैसी समस्या उत्पन्न करते हैं, तो वहीं दूसरी ओर प्रदूषण की समस्या को भी बढ़ा रहे हैं। यह अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। इस गंभीर विषय को जल्द-से-जल्द हल करने का प्रयास किया जाना चाहिए।


17. नाटक में अच्छे प्रदर्शन के बाद मित्र से हुई बातचीत को लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए।

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Ans.

अर्जुन – (खुशी से) वाह ! क्या नाटक था ! तुमने तो कमाल का अभिनय किया!

रिया- (मुस्कुराते हुए) धन्यवाद यार ! तेरा अभिनय भी बहुत अच्छा था।

अर्जुन – (गर्व से) हाँ, सबने मेरे अभिनय की तारीफ की।

रिया- (हँसते हुए) हाँ, तू तो हीरो बन गया था!

अर्जुन – (गंभीरता से) पर तुमने भी तो सचमुच बहुत मेहनत की थी।

रिया – (शर्माते हुए) हाँ, थोड़ी मेहनत तो की थी।

अर्जुन – (उत्साह से) चलो, जल्दी से मिठाई खाते हैं!

रिया – (खुशी से) चलो!


अथवा

बढ़ती हुई महँगाई के विषय में पूनम और कुसुम के बीच होने वाले संवाद को लिखिए।

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Ans. पूनम – अरे कुसुम क्या तुमने आज का अखबार पढ़ा?

कुसुम – हाँ, बढ़ती महँगाई ने तो आम आदमी का जीना हराम कर दिया है। रोज़ कमाकर खाने वाले लोगों का तो बहुत ही बुरा हाल है।

पूनम – अरे! तुमने पढ़ा, दूध की कीमत में और ऑटोरिक्शा के किराए में कितनी बढ़ोतरी हो गई। कुसुम – हाँ, पढ़ा, सरकार आम जनता को मूर्ख समझती है। पेट्रोल के दाम घटाकर रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ा दिए ।

पूनम – सही बात है। बेचारे गरीब बच्चों का क्या होगा। जो थोड़ा-बहुत दूध उन्हें नसीब होता था, अब तो वह भी मिलने से रहा।

कुसुम – जब भी महँगाई बढ़ती है उसका दुष्प्रभाव निम्नवर्ग व मध्यमवर्ग पर पड़ता है। अमीर लोगों पर तो वैसे भी इसका असर नहीं होता। उनकी बला से महँगाई बढ़े चाहे घटे।

पूनम – नहीं, ऐसी बात नहीं है। असर उन पर भी होता है पर आय अधिक होने से उन पर महँगाई की मार का असर उतना नहीं होता जितना गरीबों पर होता है।

कुसुम – ऑटोवाले पहले भी मनमानी करते थे, अब भी करेंगे। सरकार को तो कुछ सोचना चाहिए।

रोजमर्रा की चीजों के दाम ज्यादा नहीं बढ़ाने चाहिए।

पूनम – हाँ, मैं तुम्हारी बात से बिलकुल सहमत हूँ। एक ओर तो सरकार गरीबी हटाओ के नारे लगाती है और दूसरी ओर महँगाई बढ़ाती है, ऐसे में आम जनता करे भी तो क्या ।

कुसुम – हालत यही रही तो आम आदमी का रहना ही मुश्किल हो जाएगा। बेचारा कैसे अपना घर चला पायेगा।

पूनम – हाँ, बिलकुल सही कह रही हो। सरकार को इस ओर कोई कदम उठाना चाहिए। अब चलती हूँ। बच्चों की बस का समय हो गया है।कुसुम – ठीक है। मैं भी चलती हूँ। मेरे बच्चे भी स्कूल से आने ही वाले हैं।